गौचर/चमोली। व्यास नीलकण्ठ महाराज के सानिध्य में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ में उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद् भागवत मोक्ष दायिनी है। श्रीमदभागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति प्राप्त होती है। महाराज ने बताया कि इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरूपण भी किया गया है। कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है जब हम अपने जीवन व व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हैं। अपने जीवन को आनंदमय, मंगलमय बनाकर अपना आत्म कल्याण करें। अन्यथा यह कथा केवल मनोरंजन, कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी।

