साधारण परिवार की पृष्ठभूमि से निकलकर गांव के नेतृत्व तक पहुंची कंचन, जताई विकास की दृढ़ इच्छा
टिहरी। थौलधार ब्लॉक के अंतर्गत अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित ग्राम पंचायत नकोट गुसांई में लगभग 22 वर्षीय कंचन ने ग्राम प्रधान बनकर इतिहास रच दिया है। इंटरमीडिएट तक शिक्षित कंचन अब इस गांव की सबसे कम उम्र की निर्वाचित प्रधान बन गई हैं। उनकी यह सफलता न सिर्फ युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि ग्रामीण नेतृत्व में नई सोच और ऊर्जा के प्रवेश का संकेत भी है
साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली कंचन के पिता गिरीश चंद मिस्त्री का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि उनकी मां एक गृहिणी हैं। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी कंचन का बचपन कठिनाइयों में बीता, लेकिन उनके भीतर गांव के प्रति गहरी संवेदना और बदलाव की तीव्र इच्छा सदैव बनी रही।
कंचन ने बताया कि उन्हें शुरू से ही गांव की समस्याएं और अव्यवस्थाएं परेशान करती थीं। उन्होंने देखा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसे मूलभूत क्षेत्रों में गांव को अभी काफी आगे ले जाने की जरूरत है। जब गांव की सीट आरक्षित हुई और उन्हें मौका मिला, तो उन्होंने बिना झिझक चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया। जीत ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूती दी है।
कंचन की जीत ने गांव में भरी नई ऊर्जा, अब शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर रहेगा फोकस
अब कंचन का लक्ष्य है कि गांव की युवा पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हो और गांव में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं। उनका मानना है कि छोटी सोच से बड़ा परिवर्तन संभव नहीं, इसलिए वह हर निर्णय में दूरगामी सोच अपनाने का प्रयास करेंगी।
कंचन की इस ऐतिहासिक जीत ने नकोट गुसांई गांव में उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है। अब पूरा गांव उनकी ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है, कि कैसे एक युवा महिला नेता गांव को विकास की नई राह पर अग्रसर करेगी।
