कोटि गांव में घंडियाल देवता की जात पर उमड़ा आस्था का सैलाब, ढोल-दमाऊ की थाप पर थिरके श्रद्धालु

नई टिहरी। जनपद के भिलंगना ब्लॉक अंतर्गत कोटि फैगुल पट्टी के ग्राम पंचायत कोटि में आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां क्षेत्र के आराध्य देव घंडियाल देवता की त्रिवार्षिक जात (मेला) अत्यंत धूमधाम और हर्षाेल्लास के साथ मनाई गई। इस धार्मिक अनुष्ठान का साक्षी बनने के लिए न केवल स्थानीय ग्रामीण, बल्कि दूर-दराज के शहरों में बस चुके प्रवासी और गांव की धियाणियां (विवाहित बेटियां) भी विशेष रूप से अपने मायके पहुंचीं। आराध्य देवता के दर्शन और पूजन के लिए उमड़ी भीड़ से पूरा गांव भक्तिमय हो गया और हर तरफ खुशी का माहौल नजर आया।

 

तीन वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाले इस भव्य आयोजन में ग्रामीणों ने पूर्ण विधि-विधान के साथ देवता की आराधना की। शनिवार को मंदिर प्रांगण में सामूहिक पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जहां समस्त ग्रामवासियों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल-दमाऊ की गूंज और जागरों के बीच देवता अपने पश्वा पर अवतरित हुए। देवता के पश्वा ने अलौकिक नृत्य करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। भक्ति और श्रद्धा के इस वातावरण में हर कोई नतमस्तक नजर आया।

 

अवतरित देवता ने अपने पश्वा के माध्यम से ग्रामीणों को एकजुटता और संस्कृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों द्वारा स्थापित परंपराएं ही समाज की धरोहर हैं और इन्हें निरंतर जीवित रखा जाना चाहिए, तभी देवता की कृपा दृष्टि सदैव क्षेत्रवासियों पर बनी रहेगी। ग्राम प्रधान संदीप कुमार ने बताया कि यह परंपरा दशकों से चली आ रही है और हर तीन साल में पूरा गांव एकजुट होकर अपने ईष्ट देव घंडियाल की सामूहिक पूजा करता है, जिससे आपसी भाईचारा भी मजबूत होता है।

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