जिलाधिकारी ने अल्ट्रासाउंड मशीनों की जांच, प्रचार-प्रसार और नियमों के पालन को लेकर दिए निर्देश

टिहरी में पीसीपीएनडीटी अधिनियम की त्रैमासिक समीक्षा बैठक सम्पन्न

टिहरी।  जिला कार्यालय के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खंडेलवाल की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की पीसीपीएनडीटी अधिनियम-1994 के तहत त्रैमासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य लिंग चयन जैसे अपराधों को रोकना, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी, और जनजागरूकता के लिए प्रभावी रणनीति बनाना था।

बैठक में जिलाधिकारी ने सभी निजी अस्पतालों में संचालित अल्ट्रासाउंड मशीनों के डेटा की गहन जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मशीनों का उपयोग अब नहीं हो रहा है और जिनका निर्धारित कार्यकाल समाप्त हो चुका है, उन्हें नियमानुसार डिस्पोज किया जाए। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को विशेष रूप से ऐसे विकासखंडों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए, जहां लिंगानुपात कम है। साथ ही जिला सूचना अधिकारी को स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रचार-प्रसार को व्यापक रूप देने के निर्देश भी दिए।

बिना डॉक्टर के अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालन पर होगी सख्त कार्रवाईः डीएम

सीएमओ डॉ. श्याम विजय ने बैठक को जानकारी दी कि जनपद में कुल 7003 अल्ट्रासाउंड किए गए हैं। उन्होंने घनसाली क्षेत्र में दो नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों की अनुमति हेतु आवेदन की जानकारी दी, जिस पर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी केंद्र को केवल तभी अनुमति दी जाएगी जब वहां पर पंजीकृत चिकित्सक की उपस्थिति सुनिश्चित हो। बिना डॉक्टर के किसी भी केंद्र का संचालन पूर्ण रूप से वर्जित है और ऐसा पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान एसीएमओ डॉ. चंदन मिश्रा ने सभी पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों में ट्रैकर सिस्टम के साथ पंजीकृत मोबाइल नंबर जोड़ने की अनुमति मांगी, जिसे जिलाधिकारी ने स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलेश्वर में रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति पर चिंता जताई और कहा कि ऐसी स्थिति में मशीन को सील किया जाए।
बैठक में समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि पूर्व की भांति “गुड्डा-गुड्डी चार्ट” को पुनः मुख्यालयों और चिकित्सा केंद्रों में प्रदर्शित किया जाए ताकि समाज में बेटियों को लेकर सकारात्मक संदेश जाए। साथ ही अल्ट्रासाउंड के बाद आने वाले लिंगानुपात डेटा की विशेष रूप से निगरानी और समीक्षा की जाए।

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