नई टिहरी। प्रधानमंत्री पोषण एवं शक्ति निर्माण योजना के तहत जनपद स्तर पर भोजन माताओं के लिए भव्य पाक कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। राजकीय होटल मैनेजमेंट एवं कैटरिंग टेक्नोलॉजी संस्थान में आयोजित इस अनूठी प्रतियोगिता में जिले भर की भोजन माताओं ने अपने हुनर का शानदार प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता का उद्देश्य मध्याह्न भोजन में पौष्टिकता और स्वाद को बढ़ावा देना रहा। जनपद के सभी नौ विकासखंडों से चयनित दो-दो उत्कृष्ट भोजन माताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। स्थानीय और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों की सुगंध से पूरा परिसर महक उठा।
पारंपरिक व्यंजनों ने जीता दिल
प्रतियोगिता में भोजन माताओं ने गढ़वाल के पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजनों पर विशेष जोर दिया। पालक की काफली, गथवाणी, कढ़ी, गहत का फाणा और चावल जैसे व्यंजन परोसे गए।
व्यंजनों की गुणवत्ता और स्वाद का मूल्यांकन करने के लिए विशेष निर्णायक मंडल गठित किया गया, जिसमें वरिष्ठ खाद्य संरक्षा अधिकारी शारदा शर्मा, होटल मैनेजमेंट संस्थान के शैक्षणिक प्रभारी एवं पोषण विशेषज्ञ मुकेश बड़थ्वाल, गृह विज्ञान प्रवक्ता राणा के साथ कक्षा पांच और आठ के छात्र-छात्राएं भी शामिल रहे।
कड़े मुकाबले के बाद विकासखंड देवप्रयाग ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। विकासखंड थौलधार द्वितीय तथा विकासखंड चंबा तृतीय स्थान पर रहे। विजेताओं को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जबकि अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।
पोषण और स्वच्छता पर जोर
कार्यक्रम में पीएम पोषण प्रभारी ने योजना के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भोजन माताएं इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जिन पर बच्चों को स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है।
मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने कहा कि नौनिहालों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है और सभी भोजन माताओं को पूर्ण निष्ठा और स्वच्छता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) पूनम चौहान ने मध्याह्न भोजन में स्थानीय एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थों को अनिवार्य रूप से शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी उत्पादों में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बच्चों के शारीरिक विकास के लिए आवश्यक हैं।
संस्थान के शैक्षणिक प्रभारी मुकेश बड़थ्वाल ने भोजन में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों की वैज्ञानिक जानकारी देते हुए कहा कि संतुलित आहार के बिना बच्चों का समुचित विकास संभव नहीं है।
