नरेंद्रनगर शहर के भूमि बंदोबस्त की मांग तेज, संघर्ष समिति ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

नई टिहरी। नरेंद्रनगर शहर के भूमि बंदोबस्त को लेकर वर्षों से उपेक्षा झेल रहे स्थानीय लोगों ने अब आवाज़ बुलंद कर दी है। भूमि बंदोबस्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें नरेंद्रनगर क्षेत्र का तत्काल भूमि बंदोबस्त कर उसे उत्तराखंड सरकार के राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की मांग की गई।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष सूरत राम आर्य के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को बताया कि वर्ष 1949 में टिहरी रियासत का भारत में विलय होने के बाद भी नरेंद्रनगर शहर और इसके आसपास के गांव आज तक राजस्व अभिलेखों में सम्मिलित नहीं हो सके हैं। नतीजतन, यहां के निवासियों को अभी तक भू-स्वामित्व अधिकार प्राप्त नहीं हो पाया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि भूमि बंदोबस्त के अभाव में अनुसूचित जाति बहुल बखरियाणा जैसे क्षेत्रों को अब तक सड़क संपर्क तक नहीं मिल पाया है। साथ ही सरकारी संस्थाओं की स्थापना में भी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं, जबकि शहर में बड़ी मात्रा में भूमि खाली पड़ी है जिसका उचित उपयोग नहीं हो पा रहा।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में सरकार पांच शहरों में ड्रोन तकनीक के माध्यम से भूमि सर्वेक्षण कार्य करा रही है, जिसमें नरेंद्रनगर भी शामिल है। ऐसे में यह आवश्यक है कि इस सर्वेक्षण के साथ-साथ नरेंद्रनगर का विधिवत भूमि बंदोबस्त भी कराया जाए, ताकि इसका भूमि रिकॉर्ड राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज हो सके और स्थानीय लोगों को उनका कानूनी भू-स्वामित्व मिल सके।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि लंबे समय से इस समस्या के चलते नरेंद्रनगर क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से अछूता रह गया है। भूमि अभिलेखों के अभाव में नागरिक न तो योजनाओं का लाभ ले पा रहे हैं और न ही भूमि संबंधी लेन-देन या निर्माण कार्य कर पा रहे हैं।
ज्ञापन पर संघर्ष समिति के संरक्षक धर्म सिंह चौहान, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष राजेंद्र राणा, दुर्गा राणा, राजेंद्र गुसाईं, रघुवीर सिंह, बिहारी लाल धीमान, प्रमोद उनियाल सहित अनेक स्थानीय लोगों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
जिलाधिकारी ने ज्ञापन प्राप्त कर समिति को भरोसा दिलाया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श कर उचित कार्यवाही की जाएगी।

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