श्रीनगर। बैसाखी पर्व पर देवलगढ़ स्थित गौरादेवी मंदिर परिसर में आयोजित बीखोत मेले में बड़ी संख्या में भक्त की भीड उमड़ी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां गौरा देवी मंदिर में पूजा अर्चना कर आर्शीवाद लिया। कटलस्यू और चलनस्यु पट्टी के दर्जनों गांव के ग्रामीणों के साथ अन्य क्षेत्रों से भी लोग यहॉ दर्शन के लिए पहुॅचें। देवलगढ मंदिर में क्षेत्र की ईष्ट देवी राजराजेश्वरी की पूजा अर्चना के साथ मेले का शुभारंभ किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में मॉं राजराजेश्वरी की डोली को भी झुलाया गया। देवलगढ़ मंदिर के पुजारी कुंजिका प्रसाद उनियाल ने बताया कि मेले में बुघाणी व सुमाड़ी गांव का विशेष महत्व है। इस मेले को लेकर लोगों में बड़ा उत्साह रहता है। पूरे साल भर इस मेले का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। मेले का आयोजन बुघाणी गांव (ससुराल पक्ष) द्वारा कराया जाता है। जब सुमाड़ी गांव (मायका पक्ष) के ग्रामीण देवलगढ पहुॅचते हैं तो तब राजराजेश्वरी को झूला झुलाया जाता हैं। देवलगढ़ में प्रत्येक वर्ष बैसाखी मेले का आयोजन बड़े स्तर पर किया जाता है। उन्होने बताया कि इस मौके पर बडी संख्या में पहुंचे भक्तांं को राजे के जमाने का बर्तन और पुराने सिखों को दिखाया गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माँ गौरा का मायका सुमाड़ी और ससुराल बुघाणी मना गया है। ग्रामवासी माँ के भजनों के साथ सुमाड़ी से पैदल यात्रा करते हुए बुघाणी पहुचंकर माँ गौरा के मंदिर मे विश्राम करते हैं और पुनः जत्थे के साथ माँ गौरा के मंदिर देवलगढ के लिए प्रस्थान करते हैं। इस दौरान गाँव के सभी बच्चे-बूढ़े माता के भजनों को गाते हुए चलते है, जिससे वातावरण माँ गौरा के जै कारों से गुंजायमान रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस पर्व को ध्याणी मेले के नाम से भी माना जाता है। गाँव-गाँव से ढोल दमाऊँ के साथ जत्थे माँ गौरा के प्रांगण में पहुँचते है। बैशाखी के दिन यहाँ बड़े मेला का आयोजन होता है। इस दिन गौरा देवी को हिंडोला पर मंदिर से बाहर लाया जाता है। और माँ गौरा के प्रांगण में बुघाणी ग्राम के लोगों द्वारा जै कारों के साथ हिंडोला (झूला) झुलाया जाता है। इस मौके पर पुजारी शक्ति प्रसाद उनियाल, पंकज उनियाल, दीपक उनियाल, दीपक पुण्डीर सहित आदि मौजूद थे।
बैसाखी पर्व पर देवलगढ़ में गौरा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
