टपकेश्वर मंदिर में ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान: 1200 सेवादारों ने तमसा नदी तट से हटाया 600 कुंतल कूड़ा

देहरादून। जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के संदेश के साथ संत निरंकारी मिशन द्वारा ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के चौथे चरण के अंतर्गत ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान का व्यापक आयोजन किया गया। यह अभियान संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वावधान में संपन्न हुआ।

अभियान के तहत भारत के 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 930 शहरों में 1600 से अधिक स्थानों पर लगभग 12 लाख स्वयंसेवकों ने भाग लिया। यह पहल केवल सफाई तक सीमित न रहकर जल संरक्षण, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश बनकर उभरी।

टपकेश्वर मंदिर में विशेष सफाई अभियान

देहरादून में टपकेश्वर मंदिर स्थित तमसा नदी के तट पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान लगभग 1200 सेवादल के भाई-बहनों और साधसंगत ने करीब 600 कुंतल कूड़ा-करकट एकत्र किया।

मसूरी जोन के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह और सेवादल के क्षेत्रीय संचालक दिलवार सिंह पंवार के नेतृत्व में सुरक्षा और वैधानिक मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया गया। इस अभियान में देहरादून, डोईवाला, बालावाला, विकासनगर और सेलाकुई शाखाओं के सेवादारों ने सक्रिय सहभागिता की।

अध्यात्म और सेवा का समन्वय

अभियान का आयोजन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के मार्गदर्शन में किया गया। बाबा हरदेव सिंह जी की शिक्षाओं से प्रेरित इस परियोजना का उद्देश्य मानवता को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना और जल स्रोतों की स्वच्छता के प्रति सामूहिक संकल्प को मजबूत करना है।

इस अवसर पर खुले प्रांगण में सत्संग का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सेवादल के प्रार्थना गीत से हुई, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा।

‘हेल्थ सिटी’ जैसी सेवा परियोजनाएं भी प्रगति पर

मिशन द्वारा “संत निरंकारी हेल्थ सिटी” जैसी मानवीय परियोजनाओं को भी विकसित किया जा रहा है, जो समाज के प्रत्येक वर्ग को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उल्लेखनीय है कि मिशन समय-समय पर ‘वननेस वन’ अभियान के माध्यम से वृक्षारोपण तथा ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के जरिए जल संरक्षण जैसे कार्यक्रम संचालित करता रहा है।

‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान केवल एक पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का संदेश है—जो प्रकृति की स्वच्छता के साथ मन की निर्मलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी सुदृढ़ करता है।

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