रुद्रप्रयाग। अखिल भारतीय धर्म संघ के पूर्व प्रांतीय महामंत्री कालिका प्रसाद सेमवाल ने उत्तराखंड के चारधाम—गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ—की धार्मिक एवं आध्यात्मिक मर्यादा बनाए रखने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चारधाम केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था, साधना और श्रद्धा के प्रमुख केंद्र हैं। सेमवाल ने कहा कि तीर्थस्थलों पर बढ़ता बाजारीकरण और मौज-मस्ती की प्रवृत्ति चिंता का विषय है। उनके अनुसार, चारधामों की गरिमा और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना प्रत्येक तीर्थयात्री का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने कहा कि जो लोग तीर्थस्थलों को पिकनिक अथवा मनोरंजन का स्थान समझकर आते हैं, उनकी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रतिबंध लागू करने की मांग की।
बद्रीनाथ में डीजे और नाच-गाने पर जताई आपत्ति
कालिका प्रसाद सेमवाल ने हाल ही में बद्रीनाथ धाम में नाच-गाने और डीजे बजाने की घटना पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम भगवान नारायण की आराधना और साधना का पवित्र केंद्र है। ऐसे स्थान पर तेज आवाज में संगीत, डीजे और आपत्तिजनक गीतों का प्रसारण धाम के धार्मिक वातावरण और गरिमा के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने प्रशासन और मंदिर व्यवस्था से अपील की कि चारधामों की धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं और तीर्थस्थलों पर ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए।
मंत्री सौरभ बहुगुणा से की मुलाकात
इधर, कालिका प्रसाद सेमवाल ने देहरादून में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा से भेंट की। इस दौरान उन्होंने अपनी पुस्तक ‘रुद्रप्रयाग दर्शन’ मंत्री को भेंट की।
मुलाकात के दौरान पुस्तक की विषयवस्तु के साथ-साथ रुद्रप्रयाग जनपद की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। सेमवाल ने रुद्रप्रयाग की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान और उसके संरक्षण से जुड़े विषयों को भी सामने रखा।
