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“सिट एंड ड्रॉ” प्रतियोगिता में 275 प्रतिभागियों ने रंगों के माध्यम से उकेरी अपने शहर और प्रकृति की सुंदरता

देहरादून। विरासत महोत्सव-2026 के तहत शुक्रवार को स्कूली विद्यार्थियों के लिए ‘सिट एंड ड्रॉ’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में 13 विद्यालयों के विद्यार्थियों सहित कुल 275 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रतियोगिता का विषय ‘माय सिटी एंड नेचर’ (मेरा शहर और प्रकृति) रखा गया, जिसमें बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और रंगों के माध्यम से शहर, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपने विचारों को खूबसूरती से प्रस्तुत किया।  प्रतियोगिता में विद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में ऐसे प्रतिभागियों ने भी मौके पर पहुंचकर हिस्सा लिया, जिन्होंने आयोजन के दौरान ही अपना पंजीकरण कर प्रतियोगिता में भागीदारी की। बच्चों ने चित्रों के माध्यम से शहर की खूबसूरती, प्राकृतिक परिवेश, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को अभिव्यक्त किया।

प्रतियोगिता में स्मॉल बेल्स (मल्टी एक्टिविटी हब), दून प्रेसीडेंसी स्कूल, सेंट जूड्स स्कूल, ब्रुकलिन स्कूल, दून सरला अकादमी, पीएम श्री गवर्नमेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज (आसरा ट्रस्ट), फ्लाईफोट पब्लिक स्कूल, दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस, श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल बालावाला, ज्ञानंदा स्कूल फॉर गर्ल्स, दिल्ली पब्लिक स्कूल विकासनगर, आर्मी पब्लिक स्कूल क्लेमेंट टाउन और वेलहम बॉयज़ स्कूल के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी कलात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता व्यक्त करने का अवसर मिला।

विरासत महोत्सव में पहली बार ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ की दस्तक, साहित्य और कविता के नाम रही शाम

 विरासत महोत्सव-2026 में इस बार साहित्य प्रेमियों को एक खास सौगात मिली। महोत्सव के साथ पहली बार जुड़ते हुए ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में ‘वॉव एट विरासत’ का विशेष आयोजन किया। साहित्य, कविता, पुस्तक चर्चा और संगीत से सजे इस कार्यक्रम में उत्तराखंड और हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को एक विशेष मंच प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सचिन चौहान के स्वागत संबोधन से हुआ। इसके बाद राजकुमार पंवार की पुस्तक ‘अब हुआ सवेरा’ पर सोमेश्वर पांडे के साथ विशेष चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में प्रख्यात हिंदी गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र की संपूर्ण काव्य रचनाओं पर भी एक विशेष सत्र हुआ।

उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘उत्तराखंड के 25 वर्ष’ पुस्तक पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें पुस्तक के संपादक संजीव चोपड़ा और सह-संपादक गंधर्व गोपाल जोशी ने राजलक्ष्मी दत्ता के साथ संवाद किया। इस सत्र की अध्यक्षता मनोज बर्थवाल ने की।

इसके बाद आयोजित हिंदी कविता सत्र में श्रुति वत्स, सोमेश्वर पांडे और भारती मिश्र ने अपनी कविताओं का पाठ किया। सत्र का संचालन सचिन चौहान ने किया, जबकि इसकी अध्यक्षता बुद्धिनाथ मिश्र ने की।

कार्यक्रम का समापन पंजाबी के महान कवि शिव कुमार बटालवी के गीतों की संगीतमय प्रस्तुति के साथ हुआ। अभिनव त्यागी ने अपनी प्रस्तुति से साहित्यिक शाम को यादगार बना दिया।

इस अवसर पर विरासत महोत्सव के निदेशक डॉ. संजीव चोपड़ा ने कहा, “वैली ऑफ वर्ड्स और विरासत का एक साथ आना दो धाराओं के संगम जैसा है।” उन्होंने इस साझेदारी को साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल बताया।

इस विशेष आयोजन ने विरासत महोत्सव को साहित्य और संगीत के एक नए आयाम से जोड़ा।

ध्रुव बेदी के सितार की मधुर तान से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता, राग शुद्ध कल्याण और ‘छाप तिलक’ ने बांधा समां

 विरासत महोत्सव-2026 के आठवें दिन सितार की मधुर स्वर लहरियों ने हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में मौजूद संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रख्यात सितार वादक ध्रुव बेदी ने अपनी शानदार प्रस्तुति से शास्त्रीय संगीत की गहराई और भारतीय संगीत परंपरा की खूबसूरती को जीवंत कर दिया। उनकी प्रस्तुति में रागों की मधुरता, सुरों का विस्तार और लयकारी का अद्भुत संगम देखने को मिला।

ध्रुव बेदी ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत राग शुद्ध कल्याण से की। उन्होंने राग का आलाप, जोड़ और झाला प्रस्तुत करते हुए उसकी मधुरता और गहराई को खूबसूरती से उभारा। इसके बाद तीनताल में विलंबित और द्रुत लय की दो बंदिशें प्रस्तुत कीं। सितार पर उनकी शानदार पकड़ और सुरों के विस्तार ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया।

इसके बाद उन्होंने राग शंकरा को मध्यलय और द्रुत लय में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन लोकप्रिय सूफी रचना ‘छाप तिलक’ की सितार पर मनमोहक प्रस्तुति के साथ हुआ। इस प्रस्तुति ने श्रोताओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

इस दौरान तबले पर पंडित अभिषेक मिश्रा ने शानदार संगत की। ध्रुव बेदी के सितार और अभिषेक मिश्रा के तबले के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। दोनों कलाकारों की जुगलबंदी ने संगीत संध्या को और प्रभावशाली बना दिया।

संगीतकार परिवार में जन्मे ध्रुव बेदी ने सितार की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता जगदीप सिंह बेदी से प्राप्त की। वर्तमान में वह पद्म भूषण से सम्मानित पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी से भी प्रशिक्षण ले रहे हैं। वह ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के टॉप ग्रेड कलाकार हैं। उन्हें संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

ध्रुव बेदी भारत के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, न्यूजीलैंड, रूस, मॉरीशस, दक्षिण कोरिया और वियतनाम सहित कई देशों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उन्हें इंडिया टुडे की शीर्ष 100 उपलब्धि हासिल करने वालों की सूची में भी शामिल किया गया है।

इसके अतिरिक्त उन्हें संस्कृति मंत्रालय की फेलोशिप, सुर संगम यूथ आइकॉन अवार्ड, अखिल भारतीय प्रतिभा पुरस्कार, आईटीसी संगीत अनुसंधान अकादमी का श्री रवि कोपिकर मेमोरियल अवार्ड और अन्य प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

विरासत महोत्सव में ध्रुव बेदी की इस प्रस्तुति ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत और सितार वादन की अद्भुत कला का यादगार अनुभव प्रदान किया।

विरासत महोत्सव में इंडियन ओशन का रॉक धमाका, ‘कंदिसा’ की प्रस्तुति पर झूम उठे संगीत प्रेमी

 विरासत महोत्सव-2026 की सांस्कृतिक संध्या में भारतीय रॉक बैंड इंडियन ओशन ने अपनी शानदार प्रस्तुति से समां बांध दिया। भारतीय लोक संगीत, शास्त्रीय सुरों और आधुनिक रॉक संगीत के अनूठे संगम ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। बैंड के ऊर्जावान प्रदर्शन और विशिष्ट संगीत शैली ने महोत्सव की रौनक को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।

इंडियन ओशन की प्रस्तुति में गायन, गिटार, बास, ड्रम और तबले का शानदार तालमेल देखने को मिला। बैंड के प्रत्येक कलाकार ने अपनी विशिष्ट संगीत शैली और ऊर्जा से मंच पर अलग ही रंग भर दिया।

इस अवसर पर हिमांशु जोशी ने गायन, निखिल राव ने गिटार, राहुल राम ने बास, अमित किलम ने ड्रम और तुहीन चक्रवर्ती ने तबले एवं पर्क्यूशन की जिम्मेदारी संभाली। पूरे कार्यक्रम की ध्वनि व्यवस्था साउंड इंजीनियर हार्दिक केशन ने संभाली।

कार्यक्रम का समापन बैंड के लोकप्रिय गीत ‘कंदिसा’ (Kandisa) की प्रस्तुति के साथ हुआ। इस गीत ने दर्शकों के बीच खास उत्साह पैदा किया और पूरी महफिल को यादगार बना दिया।

इंडियन ओशन को भारत में फ्यूजन रॉक संगीत शैली के अग्रदूतों में गिना जाता है। बैंड की संगीत शैली में भारतीय रागों की पारंपरिक धुनों को रॉक संगीत, गिटार और ड्रम के साथ जोड़ा जाता है। इसके संगीत में भारतीय लोकगीतों, सूफीवाद, पर्यावरण, पौराणिक कथाओं और सामाजिक विषयों की झलक भी देखने को मिलती है।

बैंड ने कलात्मक क्षेत्रों पर कॉरपोरेट स्वामित्व के विरोध में अपना एल्बम ‘16/330 खजूर रोड’ ऑनलाइन मुफ्त में जारी किया था। इसके अलावा बैंड को पिछले 25 वर्षों के 25 महानतम भारतीय रॉक गीतों में भी स्थान मिला है। रोलिंग स्टोन इंडिया ने उनके चर्चित एल्बम ‘कंदिसा’ के दो गीत ‘मा रेवा’ और ‘कंदिसा’ को प्रकाशित किया है।

इंडियन ओशन ने फिल्म संगीत के क्षेत्र में भी अपनी खास पहचान बनाई है। बैंड ने अनुराग कश्यप निर्देशित फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ का साउंडट्रैक तैयार किया। इसके अलावा ‘पीपली लाइव’ और समीक्षकों द्वारा सराही गई फिल्म ‘मसान’ के साउंडट्रैक में भी योगदान दिया। वर्ष 2026 में बैंड ने संगीतकार चार दीवारी के ईपी ‘परवाना’ के गीत ‘आशिकाना’ में भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई।

विरासत महोत्सव के मंच पर इंडियन ओशन की इस प्रस्तुति ने एक बार फिर साबित किया कि भारतीय पारंपरिक संगीत और आधुनिक रॉक का संगम संगीत प्रेमियों के बीच कितना लोकप्रिय हो सकता है।

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