नई टिहरी। धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय, नरेंद्रनगर में एक दिवसीय उद्यमिता ओरिएंटेशन एवं जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उन्हें स्वरोजगार, स्टार्टअप और स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार के अवसरों की जानकारी देना रहा।
कार्यक्रम में देवभूमि उद्यमिता योजना, टिहरी के परियोजना अधिकारी एवं जिला समन्वयक दिग्विजय सिंह सजवाण मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वे रोजगार सृजित करने वाले सफल उद्यमी भी बन सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, नेतृत्व क्षमता, जोखिम उठाने की मानसिकता और व्यवसाय की योजना तैयार करने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़कर युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। ऑफबीट गांवों, रागी आधारित उत्पादों, भीमल शैम्पू और डिजिटल सुरक्षा उपकरणों जैसे क्षेत्रों को उन्होंने उद्यमिता की संभावनाओं के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया।
विद्यार्थियों की उद्यमशील क्षमता का हुआ मूल्यांकन
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की उद्यमिता के प्रति रुचि एवं अभिरुचि का मूल्यांकन भी किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों की उद्यमशील क्षमता और रुचि का आकलन किया गया, जिसमें आफिया, हिमांशी और आशीष पुंडीर ने उत्कृष्ट स्थान प्राप्त किया।
योजना के नोडल अधिकारी डॉ. संजय महर ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप इकोसिस्टम, सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाकर अपने विचारों को व्यावसायिक रूप देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने उद्यमिता, स्टार्टअप, वित्तीय सहायता और स्वरोजगार से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समाधान किया और उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय नेगी ने वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच विकसित करने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. नेगी ने उत्पाद आधारित रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में डॉ. सोनी, डॉ. भारती, डॉ. आशा सहित कर्मचारी शिशुपाल, अजय और विशाल तथा आयुषी गंगोटी समेत 50 से अधिक छात्र-छात्राओं और संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
