देहरादून: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। आगामी चारधाम यात्रा को देखते हुए राज्य सरकार ने फिलहाल यह जिम्मेदारी विशाल मिश्रा (जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग) को अतिरिक्त रूप से सौंप दी है।
दोहरी जिम्मेदारी पर उठे सवाल
विशाल मिश्रा के पास एक ओर रुद्रप्रयाग जिले की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर बीकेटीसी के सीईओ का कार्यभार भी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक ही अधिकारी दोनों अहम जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा पाएंगे, खासकर तब जब केदारनाथ धाम में इस समय सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं और बदरीनाथ धाम चमोली जिले में स्थित है।
कई महत्वपूर्ण पद अब भी खाली
समिति में केवल सीईओ ही नहीं, बल्कि एडिशनल सीईओ, डिप्टी सीईओ और कार्याधिकारी (केदारनाथ) जैसे कई अहम पद लंबे समय से रिक्त हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
योग्यता में बदलाव पर विवाद
सूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, बीकेटीसी बोर्ड ने 9 जुलाई 2025 की बैठक में सीईओ पद की अर्हताओं में संशोधन का प्रस्ताव पारित किया। 2023 की सेवा नियमावली में प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी (वरिष्ठ पीसीएस/कनिष्ठ आईएएस) की अनिवार्यता को हटाने की बात कही गई है।
इस फैसले का विरोध करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि देश के अन्य प्रमुख श्राइन बोर्डों में आईएएस अधिकारियों को सीईओ नियुक्त किया जाता है। ऐसे में केवल स्नातक योग्यता रखने वाले व्यक्ति को इस पद पर लाना प्रशासनिक गड़बड़ी को जन्म दे सकता है।
पूर्व सीईओ का कार्यकाल भी विवादों में
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में विजय प्रसाद थपलियाल को बीकेटीसी का सीईओ नियुक्त किया गया था, जिनके कार्यकाल के दौरान कई विवाद सामने आए। आरोपों के बाद मार्च 2026 में उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें मूल विभाग में वापस भेज दिया गया।
चारधाम यात्रा से पहले बढ़ी चिंता
चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है, जिसमें लाखों श्रद्धालु केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम पहुंचते हैं। ऐसे में बीकेटीसी में स्थायी और सक्षम नेतृत्व का अभाव व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर चिंता बढ़ा रहा है।
सरकार पर स्थायी समाधान का दबाव
शासन स्तर पर नए सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है और इस बार पीसीएस अधिकारी की तैनाती की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि चारधाम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन के सुचारू संचालन के लिए अनुभवी और पूर्णकालिक प्रशासनिक नेतृत्व बेहद जरूरी है।
