अराईयांवाला में श्री झण्डे जी का भव्य आरोहण, संगतें गुंजायमान हुईं जयकारों से

देहरादून/हरियाणा। राजधानी देहरादून में श्री झण्डे जी मेले की तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही हैं। शुक्रवार को अराईयांवाला, हरियाणा में श्री झण्डे जी का विधिवत आरोहण संपन्न हुआ। दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज के सज्जादे गद्दीनशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने मेले की तैयारियों को लेकर मेला संचालन समिति को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए।

विधिवत पूजा-अर्चना और आरोहण

शुक्रवार को दरबार में श्री झंडा साहिब की विशेष पूजा-अर्चना और अरदास संपन्न हुई। 100 सदस्यीय जत्था अराईयांवाला के लिए सुबह 9 बजे रवाना हुआ और दोपहर 12:10 बजे पहुंचा।

परंपरा के अनुसार पुराने श्री झंडे को सम्मानपूर्वक उतारकर दूध, दही, घी, मक्खन, गंगाजल और पंचगव्य से पवित्र स्नान कराकर 60 फीट ऊंचे नए श्री झण्डे का हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भव्य आरोहण किया गया। इस दौरान श्रद्धालु गुरु महाराज की महिमा के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा।

संगतों की पदयात्रा

25 फरवरी को श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज के हुक्मनामा के अनुसार बड़ागांव, हरियाणा से प्रारंभ हुई पैदल संगत अब देहरादून की ओर बढ़ रही है। यह पदयात्रा भजन-कीर्तन और सामूहिक श्रद्धा का अद्वितीय उदाहरण है।

28 फरवरी को संगत का स्वागत श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल, सहसपुर में किया जाएगा। 1 मार्च को संगत देहरादून में प्रवेश करेगी, जहां कांवली गांव में भव्य स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। दर्शनी गेट पर पुष्पवर्षा, बैंड-बाजों और जयकारों के साथ संगत का अभिनंदन होगा।

मेले की तैयारियां

श्री झण्डा जी मेला अधिकारी विजय गुलाटी ने बताया कि मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। श्री दरबार साहिब परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा, रंग-बिरंगी रोशनी, पुष्प सज्जा और भव्य प्रवेश द्वारों से सजाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, चिकित्सा, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात की विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

होली के पश्चात देश-विदेश से संगतों का आगमन और तेज हो जाएगा। 7 मार्च को पूरब की संगत की विदाई और 8 मार्च को श्री झण्डे जी के भव्य आरोहण के साथ इस वर्ष के मेले का विधिवत शुभारंभ होगा।

श्री झण्डे जी मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा भावना और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। यह मेला श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और उल्लास का अनुपम पर्व साबित होता है।

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