उत्तरकाशी। जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जमकर बर्फबारी संजीवनी बनकर बरसी है । क्षेत्र के जो बागबान सूखे की मार झेल रहे थे, उन्होंने बर्फबारी होने के बाद राहत की सांस ली है। शुक्रवार से मौसम में आए बदलाव ने बागवानों के चेहरों पर मुस्कुराहट ला दी है।
हर्षिल, मुखवा, बगोली, धराली, झाला , और यमुना वैली के सेवरी, सरनौल, आराकोट बंगाणा, शांकरी, आदि क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है । सेब के पेड़ों के लिए माइनस 15 डिग्री तक का चिलिंग आवर 1600 घंटे तक मिलना अनिवार्य होता है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ रजनीश सिंह का कहना है कि बर्फबारी और बारिश बगीचों के प्रबंधन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अभी तक लोग बगीचों में केवल कटाई-छंटाई तक ही सीमित थे अब बागवान गड्ढे खोदकर नए पौधे लगाने और जैविक खाद लगाने का काम कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि साल के अंत में पड़ी यह नमी पौधों में पोषक तत्वों को बनाए रखने में सहायक होती है और मई-जून में पड़ने वाले सूखे से भी निजात दिलाती है। यदि चिलिंग आवर और नमी पूरी हो जाए तो इस साल अच्छी फसल की उम्मीद की जा सकती है।
