टिहरी में कर्मचारियों ने भरी हुंकार, 18 सूत्रीय मांगों को लेकर अस्पताल गेट पर जमकर की नारेबाजी

 टिहरी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखंड के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर अपनी 18 सूत्रीय मांगों को लेकर टिहरी जनपद के कर्मचारियों ने भी मोर्चा खोल दिया है। सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति के विरोध में चल रहे चरणबद्ध आंदोलन के तहत गुरुवार को जिला कार्यकारिणी की ओर से जिला चिकित्सालय बौराड़ी के परिसर में एक विशाल गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। परिषद के जिलाध्यक्ष भगवान सिंह राणा की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रदर्शन में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की और सरकार को चेताया कि यदि उनकी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन और संयुक्त नेतृत्व जिला मंत्री जयवीर सिंह रांगड़, मुख्य सलाहकार प्रेम लाल शाह और मातृ एवं शिशु कल्याण विभाग की सुधा पाण्डेय ने किया।

गेट मीटिंग के दौरान कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को विस्तार से रखा। वक्ताओं ने प्रमुखता से एसीपी व्यवस्था को पूर्ववत बहाल करने और विभिन्न संवर्गों में व्याप्त वेतन विसंगतियों को तत्काल दूर करने की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें केंद्र सरकार के कर्मचारियों की भांति मकान किराया भत्ता और संशोधित वाहन भत्ता दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों के हित में 30 जून और 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को काल्पनिक वेतनवृद्धि का लाभ देने की मांग जोर-शोर से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली को बुढ़ापे का सहारा बताते हुए इसे अनिवार्य रूप से लागू करने, पेंशन राशिकरण की अवधि घटाने और वर्कचार्ज कर्मचारियों को भी पेंशन व ग्रेच्युटी का लाभ देने की वकालत की। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी कर्मचारियों में गहरा रोष देखने को मिला। उन्होंने गोल्डन कार्ड योजना के तहत पूर्ण कैशलेस चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने और सेवानिवृत्त कार्मिकों के चिकित्सा बिलों के भुगतान के लिए स्पष्ट शासनादेश जारी करने की मांग की।

आंदोलन को व्यापक समर्थन देते हुए उत्तरांचल मिनिस्ट्रियल फेडरेशन टिहरी के अध्यक्ष पूरण सिंह राणा ने परिषद की सभी मांगों को जायज ठहराते हुए पूर्ण सहयोग की घोषणा की। सभा में वक्ताओं ने आठवें वेतन आयोग में कर्मचारी परिषद की भागीदारी सुनिश्चित करने, पदोन्नति में शिथिलीकरण देने और विभागीय पुनर्गठन में कर्मचारी संगठनों से संवाद करने की बात कही। साथ ही, निगमों व निकायों के कार्मिकों को समान सुविधाएं देने, वर्दीधारी संवर्गों को विशेष लाभ प्रदान करने और आउटसोर्सिंग कर्मियों की सेवा सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने पर जोर दिया गया।
आंदोलन की आंच केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रही, बल्कि विकासखंड स्तर पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिला। घनसाली में खंड विकास अधिकारी कार्यालय परिसर में विकासखंड स्तरीय समन्वय समिति ने जोरदार गेट मीटिंग की, जिसका नेतृत्व उपेंद्र बमोला, दीपक थपलियाल और सुषमा ने संयुक्त रूप से किया। यहां कर्मचारियों को एकजुट होकर जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया गया।

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