शिक्षा व्यवस्था सुधारने को लेकर प्रशासन सख्त, बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने वाले शिक्षकों की तैयार होगी सूची

नई टिहरी।  जनपद टिहरी गढ़वाल की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। अक्सर यह शिकायतें मिल रही थीं कि पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात शिक्षक अपने कार्यस्थल पर रहने के बजाय देहरादून या अन्य मैदानी शहरों से रोजाना आवागमन कर रहे हैं, जिसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि सभी शिक्षकों को अपनी तैनाती स्थल के दायरे में ही निवास करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि “अप-डाउन” संस्कृति के कारण शिक्षक न तो समय पर स्कूल पहुंच पाते हैं और न ही पूरा समय विद्यालय में दे पाते हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

जिलाधिकारी ने विभिन्न जनसुनवाई कार्यक्रमों, जनता दर्शन और बीडीसी बैठकों में लगातार मिल रही शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि कई शिक्षक अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरत रहे हैं। वे स्कूल खुलने के काफी देर बाद पहुंचते हैं और छुट्टी के समय से पहले ही वापस जाने की जल्दी में रहते हैं। इस प्रवृत्ति से दूरदराज के गांवों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है और पठन-पाठन का कार्य बुरी तरह बाधित हो रहा है। इस स्थिति को खेदजनक बताते हुए जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि शिक्षक अपने कार्यक्षेत्र में ही प्रवास करें।

 

नियमों का हवाला देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि शासकीय कार्मिकों के लिए अपना मुख्यालय या कार्यस्थल छोड़ने से पूर्व सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य है। उन्होंने पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश सरकार के 15 दिसंबर 1981 के उस शासनादेश का भी उल्लेख किया, जिसमें आवास भत्ता और निवास स्थान के संबंध में कार्मिकों को अपने कार्यस्थल की 8 किलोमीटर की परिधि में रहने की बात कही गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में भी शासन स्तर से समय-समय पर इस संबंध में निर्देश जारी होते रहे हैं, लेकिन धरातल पर इसका पालन नहीं हो रहा था। अब प्रशासन ने इन पुराने नियमों को सख्ती से लागू करने की ठान ली है।

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