डोईवाला तहसील में किसानों का आक्रोश फूटा, भाकियू (टिकैत) ने बोला हल्ला बोल

गन्ने का भाव ₹500 क्विंटल करने व जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा की दो क्षेत्रीय मांगें केंद्र में रहीं
डोईवाला। डोईवाला तहसील  में  किसान नाराज़गी का बड़ा मंच बन गई, जब भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में किसानों ने केंद्र सरकार की कृषि नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि एमएसपी, ऋणमाफी और किसान मुद्दों पर सरकार बीते पाँच वर्षों से केवल आश्वासन देती रही है, जबकि जमीन पर हालात जस के तस बने हुए हैं। किसानों ने राष्ट्रपति के नाम 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन नायब तहसीलदार आर.एस. रावत को सौंपा।
प्रदर्शन में किसानों ने डोईवाला क्षेत्र की दो गंभीर समस्याओं को विशेष रूप से उठाया—पहली, गन्ने का समर्थन मूल्य तत्काल प्रभाव से ₹500 क्विंटल किया जाए। दूसरी, जंगली जानवरों द्वारा फसलों के हो रहे भारी नुकसान को रोकने के लिए सुरक्षा घेराबंदी और मुआवजा नीति लागू की जाए।
भाकियू (टिकैत) के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह खालसा ने कहा कि दिल्ली बॉर्डर किसान आंदोलन के बाद समिति बनाकर समाधान का वादा किया गया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट और निर्णय आज तक अलमारी में धूल फांक रहे हैं। खालसा ने आरोप लगाया कि किसानों की हालत लगातार बिगड़ रही है, पर सरकार केवल बयानबाजी में उलझी है।
ब्लॉक अध्यक्ष सुरजीत सिंह ने फसल बर्बादी को किसानों के लिए अस्तित्व का संकट बताते हुए कहा कि एक रात में जंगली जानवर महीनों की मेहनत खत्म कर देते हैं और प्रशासनिक कार्रवाई शून्य है।
नगर अध्यक्ष विजय बक्शी ने कहा कि लगातार बढ़ती लागत के बीच ₹500 क्विंटल गन्ना मूल्य किसानों की मजबूरी नहीं, बल्कि हक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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