माघ मेले की छठी गीत सांध्य रही प्रीतम भरतवाण के नाम

उत्तरकाशी।  माघ मेला में आयोजित  सांस्कृतिक संध्या पर जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण के गीतों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे। जागर सम्राट ने ध्याणि बल कैमरा का बीच फोटो की मशीन सुंदरा छोरी, गजिमाला, किमसारी हाट मां गीतों और जागरों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी।
माघ मेला बाराहाट कू थौलू उत्तरकाशी में सांस्कृतिक संध्या के बतौर मुख्य अतिथि पालिका अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान और जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान ने दीप जलाकर शुभारंभ किया।  भूपेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि  मेले आपसी मेलजोल बढ़ाने और पौराणिक संस्कृति को आगे बढ़ने का सबसे बेहतर माध्यम हैं। माघ मेला भी थौल-मेलों, संस्कृति के संरक्षण को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है।
पद्मश्री जागर सम्राट भरतवाण की प्रस्तुतियों को सुनने के लिए लोग देर शाम से पांडाल में जुटने शुरू हो गए थे। करीब रात साढ़े आठ बजे प्रीतम पांडाल में पहुंचे, दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। उन्होंने शिव संध्या, मां भगवती, नारैणी मेरी माता भवानी जागर से सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया। उसके बाद उन्होंने हम कुशल छौंउ मांजी दगडियों दगड़ी, बांद अमरावती,बंसत पंचमी,तुम्हारी खुद मां सहित दशकों की फरमाइश पर कई गीतों की प्रस्तुति देकर देर रात तक दर्शकों झुमाया।
जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान ने जागर सम्राट को शॉल और स्मृति चिह्न भेंट किया।

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