देहरादून |
रक्षाबंधन से पहले देहरादून की ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार मिल रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आकर्षक हैंडमेड राखियां तैयार कर स्वरोजगार की नई मिसाल पेश कर रही हैं। रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड में बड़ी संख्या में महिलाएं राखी निर्माण में जुटी हैं।
इनमें रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र की सास-बहू लीला रावत और अलका रावत की जोड़ी खास पहचान बना रही है। दोनों महिलाएं नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। इस वर्ष उन्होंने 2,000 से अधिक राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें करीब 1,500 राखियां तैयार हो चुकी हैं।
पिछले साल 1,200 राखियों से हुआ 25 हजार रुपये का मुनाफा
लीला और अलका ने बताया कि पिछले वर्ष प्रशासन के सहयोग से उन्हें बेहतर बाजार मिला। उन्होंने करीब 1,200 राखियां तैयार कर सीधे बाजार में बेचीं और लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा कमाया। इससे उत्साहित होकर इस वर्ष उन्होंने कारोबार को और विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है।
प्राइवेट नौकरी छोड़ सास के साथ शुरू किया कारोबार
अलका रावत ने पिछले वर्ष प्राइवेट नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला के साथ स्वरोजगार शुरू किया। दोनों ने मालदेवता में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान शुरू की है। यहां राखियों के अलावा अन्य हस्तनिर्मित और स्थानीय उत्पाद भी बेचे जा रहे हैं।
अलका के मुताबिक, एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्हें आय का बेहतर अवसर मिला और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मदद मिली।
इंस्टाग्राम से भी मिल रहे राखियों के ऑर्डर
अब इन महिलाओं का कारोबार स्थानीय बाजार से आगे डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच गया है। ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म के जरिए भी ग्राहकों से राखियों के ऑर्डर मिल रहे हैं। महिलाएं ऑनलाइन ऑर्डर तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं।
इनकी राखियों में ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे और रिबन समेत कई सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष और नजरबट्टू जैसे पारंपरिक एवं आधुनिक डिजाइन ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। डिजाइनिंग से लेकर प्रिंटिंग, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार तक का काम महिलाएं स्वयं कर रही हैं।
2016 से एनआरएलएम से जुड़ी हैं लीला
आशा किरण स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष लीला रावत वर्ष 2016 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला, जिससे स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
सहसपुर और डोईवाला की महिलाएं भी तैयार कर रहीं राखियां
रायपुर के साथ सहसपुर और डोईवाला की स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भी बड़े स्तर पर राखियां तैयार कर रही हैं। डोईवाला की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत वैभव लक्ष्मी और पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों से जुड़ी करीब 100 महिलाएं राखियां बना रही हैं। रायवाला और श्यामपुर के बाजारों में स्टॉल लगाकर इनकी बिक्री की जा रही है।
सहसपुर विकासखंड के सक्षम क्लस्टर की महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं। उनकी राखियों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है और सेलाकुई, सहसपुर तथा विकासनगर में भी उन्हें अच्छा बाजार मिल रहा है।
देहरादून के मॉल और सचिवालय में लगेंगे स्टॉल
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए देहरादून के तीन-चार प्रमुख मॉलों में राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे। उन्होंने आमजन से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित राखियों और स्थानीय उत्पादों की खरीद कर उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की अपील की।
सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार के अनुसार, 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत लगाए जाने वाले इन स्टॉलों पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं राखियों के साथ विभिन्न पहाड़ी और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री करेंगी।
मालदेवता की लीला और अलका की सास-बहू की जोड़ी समेत जिलेभर की ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को कारोबार में बदलकर नारी सशक्तीकरण और स्थानीय स्वरोजगार की नई तस्वीर पेश कर रही हैं।
