पर्यटन, हस्तशिल्प और हरित ऊर्जा क्षेत्र की स्किल काउंसिल्स के साथ तीन एमओयू; एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा एनालिटिक्स समेत आधुनिक तकनीकों की भी मिलेगी ट्रेनिंग
हरिद्वार। स्कूली शिक्षा को कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में भारतीय शिक्षा बोर्ड ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नोएडा स्थित बोर्ड मुख्यालय में स्वामी रामदेव की मौजूदगी में पर्यटन एवं आतिथ्य, हस्तशिल्प एवं कालीन तथा हरित ऊर्जा क्षेत्र की स्किल काउंसिल्स के साथ तीन समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इन समझौतों के माध्यम से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा के अनुरूप व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ ऐसे कौशल से जोड़ना है, जो भविष्य में उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकें।
पारंपरिक हुनर के साथ आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग
कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को पारंपरिक कौशल के साथ आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स और वेब डिजाइनिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे छात्रों को बदलते रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
स्थानीय कारीगरों से सीखेंगे छात्र
बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एनपी सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों को स्थानीय कारीगरों से प्रशिक्षण लेने का अवसर भी मिलेगा। इसके अलावा छात्रों को पतंजलि इंडस्ट्रीज में 15 दिवसीय इंटर्नशिप का अवसर प्रदान किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यस्थल के अनुभव के साथ उद्योग की कार्यप्रणाली को समझने का मौका मिलेगा।
रोजगार के साथ स्वरोजगार पर भी जोर
इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि युवाओं को ऐसे कौशल से जोड़ना जरूरी है, जिससे वे केवल रोजगार पाने वाले न बनें, बल्कि भविष्य में स्वरोजगार के अवसर भी पैदा कर सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा को व्यावहारिक कौशल और रोजगार से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
भारतीय शिक्षा बोर्ड की इस पहल से स्कूली विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ व्यावसायिक और तकनीकी दक्षता हासिल करने का अवसर मिलने की उम्मीद है।
