पहाड़ की छह महिलाओं ने बदली अपनी तकदीर, ‘सरस रेस्टोरेंट’ से सालाना 13 लाख तक का कारोबार

रुद्रप्रयाग: अगर हुनर को सही दिशा और मेहनत को उचित मंच मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं। रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि में सुमतिसुधा स्वयं सहायता समूह की छह महिलाओं ने इसे सच कर दिखाया है। वर्ष 2022 से ये महिलाएं मिलकर ‘सरस रेस्टोरेंट’ का संचालन कर रही हैं और आज यह रेस्टोरेंट उनकी आजीविका का मजबूत आधार बन चुका है।

पहाड़ी स्वाद बना रोजगार का जरिया

सुमतिसुधा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने अपने पारंपरिक हुनर को स्वरोजगार से जोड़ा है। ‘सरस रेस्टोरेंट’ में मंडुवा, झंगोरा और विभिन्न पहाड़ी दालों से तैयार पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन ग्राहकों को परोसे जाते हैं। पहाड़ के स्थानीय स्वाद को रेस्टोरेंट की खास पहचान बनाकर महिलाओं ने न केवल अपनी आमदनी का जरिया तैयार किया, बल्कि स्थानीय उत्पादों को भी बाजार उपलब्ध कराया है।

मंडुवा और झंगोरा जैसे पारंपरिक अनाजों से तैयार व्यंजनों की मांग बढ़ने से स्थानीय उत्पादकों को भी इसका लाभ मिल रहा है। इस तरह महिलाओं की यह पहल स्थानीय खान-पान की संस्कृति को आगे बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का काम कर रही है।

एनआरएलएम से मिला सहयोग और मार्गदर्शन

महिलाओं के इस प्रयास को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से सहयोग और मार्गदर्शन मिला। सरकारी योजनाओं और सहायता का लाभ उठाकर समूह की महिलाओं ने अपने कौशल को व्यवसाय का रूप दिया।

समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के जरिए रेस्टोरेंट के संचालन, स्थानीय उत्पादों के इस्तेमाल और स्वरोजगार की संभावनाओं को समझा। इसके बाद छहों महिलाओं ने मिलकर ‘सरस रेस्टोरेंट’ को आगे बढ़ाया।

सालाना 12 से 13 लाख रुपये की आमदनी

‘सरस रेस्टोरेंट’ के सफल संचालन से समूह को सालभर में करीब 12 से 13 लाख रुपये की आमदनी हो रही है। समूह की संचालक पूनम पंवार के अनुसार, रेस्टोरेंट से होने वाली आय से छह परिवारों की आजीविका को संबल मिला है।

रेस्टोरेंट के जरिए सभी छह महिलाओं को नियमित रोजगार भी मिल रहा है। इससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल रही है।

दूसरी ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

सुमतिसुधा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की सफलता अब क्षेत्र की दूसरी ग्रामीण महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

इन महिलाओं ने साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद पारंपरिक हुनर और स्थानीय संसाधनों को सही दिशा दी जाए तो रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। ‘सरस रेस्टोरेंट’ आज सिर्फ भोजन उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं, बल्कि महिला आत्मनिर्भरता, स्थानीय उत्पादों और पहाड़ी संस्कृति को बढ़ावा देने की एक सफल पहल बन चुका है।

 

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