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कासिगा स्कूल में ‘फेस्टोरिया 2026’ की धूम, वार्षिकोत्सव में दिखी प्रतिभा और भारतीय संस्कृति की झलक

‘उद्गम से उदय’ थीम पर आधारित वार्षिकोत्सव में विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए रंगारंग कार्यक्रम; विज्ञान, गणित, कला और नवाचार की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

देहरादून। कासिगा स्कूल में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक चेतना और व्यावहारिक कौशल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वार्षिक फेटे ‘फेस्टोरिया 2026’ और वार्षिकोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर शैक्षणिक प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, मनोरंजक गतिविधियों और विद्यार्थियों की वर्षभर की उपलब्धियों ने आयोजन को विशेष बना दिया।विद्यालय का वार्षिकोत्सव 2026 ‘उद्गम से उदय’ (From Beginnings to Brilliance) विषय पर आधारित रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता, शैक्षणिक उपलब्धियों और सामूहिक प्रयासों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला।

समारोह में विद्यालय के अध्यक्ष रमेश बत्ता, प्रथम महिला पूनम बत्ता, निदेशक सिद्धार्थ बत्ता एवं चांदनी बत्ता, विद्यालय प्रमुख डॉ. माधव देव सारस्वत तथा उप विद्यालय प्रमुख सुनील जैन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के पूर्व सचिव एवं पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल स्वरूप रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना, शांति-पाठ और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों ने ‘द यंग सिम्फनी’ नामक ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुति और अंग्रेजी नाटक ‘कैओस इन द मेन्यू’ के माध्यम से अपनी कलात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।

इस अवसर पर विद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘कासिगा स्कूल ईयरबुक 2026’ का विमोचन किया गया। साथ ही उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। जॉन मेसन मेमोरियल अवॉर्ड्स के अंतर्गत अंग्रेजी साहित्यिक अभिव्यक्ति, हिंदी साहित्यिक उत्कृष्टता और रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। विभिन्न हाउस गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और हाउसों की उपलब्धियों की भी सराहना की गई।

समारोह का मुख्य आकर्षण नृत्य-नाटिका ‘द सिल्क रोड’ रही। इसके माध्यम से प्राचीन रेशम मार्ग के जरिए विभिन्न सभ्यताओं, संस्कृतियों, विचारों और परंपराओं के बीच हुए ऐतिहासिक आदान-प्रदान को नृत्य, संगीत, अभिनय और काव्य के माध्यम से जीवंत किया गया। प्रस्तुति ने विविधता में एकता, पारस्परिक सम्मान और सांस्कृतिक सहयोग का संदेश दिया।

फेस्टोरिया 2026 में मनोरंजन और रचनात्मकता का संगम

कासिगा स्कूल का वार्षिक फेटे ‘फेस्टोरिया 2026’ विद्यालय के स्विमिंग पूल एवं जिम क्षेत्र में आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों और आगंतुकों के लिए लकी ड्रॉ, पॉटरी, डीजे म्यूजिक, अंडरवॉटर कॉइन चैलेंज, व्हील ऑफ फॉर्च्यून और रिंग टू विन सहित अनेक मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की गईं। हस्तनिर्मित उत्पादों और विभिन्न खाद्य पदार्थों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे।

विज्ञान, गणित और नवाचार के मॉडल ने खींचा ध्यान

फेस्टोरिया के अंतर्गत आयोजित विषय आधारित प्रदर्शनियों में अंग्रेजी, हिंदी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, कंप्यूटर और कला सहित विभिन्न विषयों से जुड़े प्रोजेक्ट प्रदर्शित किए गए।

‘मैथमेटिक्स अराउंड अस’ गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने दैनिक जीवन में गणित की उपयोगिता को रोचक तरीके से समझाया। वहीं विज्ञान एवं नवाचार प्रदर्शनी में अल्कोहल सेंसर हेलमेट, एरोपोनिक्स, डीएनए डबल हेलिक्स, बायो-कटलरी, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, थर्मो रूफ और फॉरेंसिक विज्ञान से जुड़े मॉडल प्रस्तुत किए गए।

विशेष प्रस्तुति ‘द जर्नी थ्रू द ह्यूमन माइंड’ में बहुबुद्धिमत्ता सिद्धांत, व्यक्तित्व और मानवीय व्यवहार से जुड़ी मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं को आकर्षक एवं रोचक ढंग से दर्शाया गया।

भारतीय विरासत और आधुनिक विचारों का संगम

‘हेरिटेज टू इनोवेशन’ विषय के अंतर्गत विद्यार्थियों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विचारों के समन्वय को प्रस्तुत किया। इसमें नुक्कड़ नाटक, संस्कृत गीत, कविता-पाठ, भाषण और ‘पीपल वर्सेस इंग्लिश लैंग्वेज’ स्किट प्रमुख आकर्षण रहे।

इसके अतिरिक्त ‘उद्गम से उदय – हमारे मूल से हमारे उत्कर्ष तक’ कार्यक्रम में भारतीय सभ्यता, ज्ञान-परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों की यात्रा को छह चरणों में प्रस्तुत किया गया।

विद्यालय की इन गतिविधियों ने शिक्षा के व्यापक उद्देश्य को रेखांकित किया। विद्यालय का प्रयास विद्यार्थियों को केवल अकादमिक रूप से सक्षम बनाना नहीं, बल्कि उनमें तार्किक चिंतन, सहयोग, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। इस आयोजन के माध्यम से शिक्षा को अनुभव, प्रयोग, मनोरंजन और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की विद्यालय की सोच प्रभावशाली रूप में सामने आई।

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