अब चार डिब्बों में अलग होगा कचरा, दिसंबर तक खत्म होगा पुराना कचरा: धकाते

देहरादून। उत्तराखंड में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत अब गीले, सूखे, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग-अलग रखने और उसके वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर दिया जाएगा। प्रदेश में करीब 500 कचरा वाहनों में चार अलग-अलग कम्पार्टमेंट तैयार किए जा रहे हैं, जबकि कचरा उठाने वाले वाहनों की निगरानी के लिए डिजिटल व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू किया जा रहा है।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकारों को नए नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये नियम देशभर में एक अप्रैल 2026 से प्रभावी हैं और उत्तराखंड में इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शहरी एवं ग्रामीण निकायों के स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। नए प्रावधानों में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ रिसाइक्लिंग, संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

तीन की जगह अब चार श्रेणियां

डॉ. धकाते के मुताबिक वर्ष 2016 के नियमों में कचरे को तीन श्रेणियों में अलग करने का प्रावधान था। नए नियमों में इसे बढ़ाकर चार श्रेणियां कर दी गई हैं। इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा शामिल हैं। इसका उद्देश्य कचरे को शुरुआत में ही अलग कर उसके पुनर्चक्रण और उचित निस्तारण को आसान बनाना है।

नए नियमों के तहत 2,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक पानी की खपत अथवा रोजाना 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा पैदा करने वाले संस्थानों में से किसी एक मानक को पूरा करने वाले प्रतिष्ठानों को बल्क वेस्ट जनरेटर माना जाएगा। ऐसे संस्थानों के पंजीकरण के साथ कचरे के प्रसंस्करण और रिसाइक्लिंग की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

हर जिले में विशेष सेल, दिसंबर तक लिगेसी वेस्ट खत्म करने का लक्ष्य

डॉ. धकाते ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 19 फरवरी 2026 के निर्देशों के बाद प्रदेश के प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल गठित किए गए हैं। ये सेल शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन, डंपिंग साइट तथा वर्षों से जमा लिगेसी वेस्ट की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

सरकार ने दिसंबर 2026 तक लिगेसी वेस्ट के निस्तारण का लक्ष्य तय किया है। राज्य में फिलहाल लगभग शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का दावा किया गया है।

1930 मीट्रिक टन कचरा रोज निकल रहा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आए आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में प्रतिदिन करीब 1,930 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न हो रहा है। इसमें से लगभग 1,800 मीट्रिक टन कचरे का रोजाना प्रसंस्करण किया जा रहा है। प्लास्टिक कचरे के लिए अलग से प्रसंस्करण व्यवस्था भी संचालित है।

कचरा संग्रहण व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 657 नए वाहन खरीदे जा रहे हैं। इनमें करीब 480 ई-वाहन शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में 22 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, लगभग 50 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी और 600 से अधिक वेस्ट कम्पोस्टर संचालित किए जा रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुन्दिरयाल और शहरी विकास विभाग के अपर निदेशक प्रवीण कुमार भी मौजूद रहे।

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