गंगा में प्रदूषित जल मामले में जल संस्थान की बड़ी कार्रवाई, एसटीपी संचालक फर्म का अनुबंध समाप्त, ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू

 

ऋषिकेश। तपोवन स्थित 3.5 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के संचालन में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर उत्तराखंड जल संस्थान (गंगा) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्लांट का संचालन कर रही एम/एस इकोटेक इंजीनियर्स कंपनी का अनुबंध समाप्त करने तथा फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

 

उत्तराखंड जल संस्थान (गंगा) के अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने बताया कि 29 मई 2026 को एसटीपी के निरीक्षण के दौरान संचालन एवं रखरखाव में कई गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई थीं। इसके बाद फर्म पर 6.16 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और कमियों को दूर करने के लिए एक माह का समय दिया गया था।

 

उन्होंने बताया कि 24 जून को दोबारा निरीक्षण किए जाने पर भी अधिकांश कमियां यथावत मिलीं। इसके बाद विभाग ने अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया और प्लांट का संचालन अपने नियंत्रण में ले लिया है। साथ ही फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

 

अधिशासी अभियंता के अनुसार, एसटीपी के इनलेट में लगभग 1000 सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) वाला रासायनिक युक्त सीवेज मिलने से प्लांट की बायो-कल्चर प्रणाली पूरी तरह प्रभावित हो गई। इसे दोबारा विकसित करने के लिए विशेषज्ञ तकनीकी टीम तैनात की गई है और व्यवस्था सामान्य होने में पांच से सात दिन का समय लग सकता है।

 

उन्होंने बताया कि संबंधित फर्म वर्ष 2022 से प्लांट का संचालन कर रही थी। प्रारंभिक जांच में आशंका है कि किसी लॉन्ड्री या अन्य औद्योगिक इकाई से रासायनिक अपशिष्ट एसटीपी में पहुंचा, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई। विभाग अब केमिकल युक्त अपशिष्ट के स्रोत की जांच कर रहा है। जांच में जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

 

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