पेयजल निगम के हाकिम पर मौन क्यों?

  • अनुशासहीनता में कार्रवाई के लिए संस्तुति, विभाग कर रहा पदोन्नति की तैयारी
  • अटाल पेयजल योजना में लगाए गए पुराने मोटर

देहरादून। अटाल पेयजल योजना में पुराने मोटर व पम्प लगाने वाले अधीशासी अभियन्ता जितेन्द्र देव सिंह को विभागीय अधिकारियों से मिली भगत कर पदोन्नित देने की तैयारी चल रही है। अगर सूत्रों की माने तो कई तथ्यों को छिपाकर शासन से जितेन्द्र देव सिंह की पदोन्नति के लिए पद श्रृजन की तैयारी चल रही है। जबकि जितेन्द्र सिंह के खिलाफ विभाग में अधिकारियों से मारपीट कर अनुशासहीनता की कार्रवाई गतिमान है। विभाग ने मारपीट मामले में संस्तुति कर कार्रवाई के लिए फाइल शासन को भेज दिया है।
अटाल पेयजल योजना में हेराफेरी की नियत से पुराने मोटर व पम्प लगाने वाले अधिशासी अभियन्ता जितेन्द्र देव सिंह ने क्षेत्रीय जनता व वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव में पुराने मोटर व पम्प के स्थान पर नए मोटर व पम्प तो लगा दिए लेकिन यहां यह कहना है कि अगर पुराने मोटर व पम्प से काम चल सकता तो अटाल पेयजल योजना के नए मोटर व पम्प लगाने की संस्तुति क्यों की गई। अगर नए मोटर व पम्प की संस्तृृति की गई तो पुराने मोटर व पम्प क्यों लगाए गए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अगर चोर चोरी का सामान लौटा दे तो क्या वह चोर नहीं होगा। इस योजना में लगभग 55 लाख़ के मोटर व पम्प लगाए जाने थे। सरकार ने जलजीवन मिशन की 456 योजनाओं पर रोक लगा दी है। लेकिन अटाल पेयजल में जहां खुले आम हेराफेरी की गई है न जाने क्यों आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की गई है। साथ ही मारपीट मामले को भी दबाने की कोशिश की जा रही है। आखिर पेयजल निगम के इस हाकिम को हर कार्रवाई से क्यों बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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