देहरादून: उदयन शालिनी द्वारा युवाओं के लिए तकनीक के प्रभाव को समझने और उस पर विचार-विमर्श करने के आज एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए उदयन शालिनी के समन्वयक विमल डबराल ने बताया कि वर्तमान समय में स्मार्टफोन और इंटरनेट की सहज उपलब्धता ने युवाओं की सोच, जीवनशैली, संवाद एवं सीखने के तरीकों को गहराई से प्रभावित किया है। जहां एक ओर ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल नौकरियों तथा सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स ने उन्हें नये अवसर प्रदान किए हैं, वहीं दूसरी ओर आवश्यकता से अधिक स्क्रीन समय, शारीरिक गतिविधियों में कमी, भ्रामक जानकारी और साइबर खतरों जैसी चुनौतियां भी खड़ी की हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता युवाओं को अकेलेपन और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की ओर ले जा रही है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आज उदयन शालिनी कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं के लिए “समाज पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव” विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर डी.सी. शर्मा, रचित फर्त्याल तथा विमल डबराल ने प्रमुख वक्ता के रूप में छात्राओं को संबोधित किया। हिमांशु शर्मा ने मॉडरेटर के रूप में कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन रैना शुक्ला द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में लगभग 50 शालिनियों ने प्रतिभाग लिया और तकनीकी प्रभावों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के लिए तकनीकी और शिक्षा, पर्यावरण, रोजगार एवं सामाजिक संबंध पर समूह चर्चा का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागी छात्राओं ने संबंधित विषयों के विभिन्न पक्षों पर गहन चर्चा की। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।