जंगलों की आग से उजड़ रही पहाड़ की आजीविका, काफल की पैदावार पर गहरा असर

गौचर।  उत्तराखंड के मध्य हिमालयी क्षेत्रों में इन दिनों जंगलों में लग रही आग ने जहां पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है, वहीं इसका असर ग्रामीणों की आजीविका पर भी साफ दिखाई देने लगा है। Gauchar और आसपास के पर्वतीय इलाकों में इस मौसम में मिलने वाला पहाड़ी फल “काफल” ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण सहारा माना जाता है। स्वाद, पौष्टिकता और औषधीय गुणों से भरपूर यह कुदरती फल हर साल सैकड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए मौसमी रोजगार का साधन बनता था, लेकिन इस बार जंगलों में लगातार फैल रही आग ने काफल की पैदावार को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।

 

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष अप्रैल और मई के महीने में जंगलों में काफल की भरपूर पैदावार होती थी। सुबह होते ही गांवों के लोग जंगलों की ओर निकल पड़ते थे और दिनभर काफल इकट्ठा कर बाजारों में बेचकर अच्छी आमदनी कर लेते थे। खासतौर पर बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए यह आय का एक बड़ा स्रोत था।

 

सिदोली क्षेत्र के गैंथी गांव निवासी गोपाल सिंह बताते हैं कि पिछले वर्ष वे प्रतिदिन जंगलों से काफल निकालकर Gauchar के मुख्य बाजार में बेचते थे, जिससे उन्हें रोजाना करीब एक हजार रुपये तक की कमाई हो जाती थी। इस आमदनी से वे अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते थे। लेकिन इस बार जंगलों में आग लगने से काफल के पेड़ और उनकी फलन दोनों प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर पेड़ों के आसपास की झाड़ियां और वनस्पति जल चुकी है, जिससे काफल समय से पहले सूखने लगा है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में लगी आग केवल पेड़ों को ही नहीं जला रही, बल्कि पहाड़ की पारंपरिक आजीविका और प्राकृतिक संपदा को भी खत्म कर रही है। काफल जैसे जंगली फलों पर निर्भर कई परिवार इस बार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। स्थानीय महिलाओं के अनुसार पहले बाजारों में काफल की अच्छी मांग रहती थी और पर्यटक भी इसे बड़े चाव से खरीदते थे, लेकिन इस बार बाजारों में काफल बहुत कम मात्रा में पहुंच रहा है।

 

वन विभाग की टीम लगातार आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में तेज हवाओं और सूखे मौसम के कारण आग तेजी से फैल रही है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते जंगलों को आग से बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में काफल सहित कई दुर्लभ वन संपदाएं समाप्त होने की कगार पर पहुंच सकती हैं।

 

ग्रामीणों ने सरकार से जंगलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था करने और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उनका कहना है कि काफल केवल एक फल नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति, पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे बचाना बेहद जरूरी है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *