ऊखीमठ। द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली मंगलवार को शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से कैलाश के लिए रवाना हो गई। डोली के धाम प्रस्थान पर श्रद्धालुओं और हक-हकूकधारी ग्रामीणों ने पुष्प अक्षतों की वर्षा कर भगवान मदमहेश्वर को भावभीनी विदाई दी तथा क्षेत्र की खुशहाली और विश्व कल्याण की कामना की। देर सांय डोली प्रथम रात्रि प्रवास के लिए राकेश्वरी मंदिर रासी पहुंची, जहां ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया।
मंगलवार प्रातः ब्रह्म बेला में मदमहेश्वर धाम के प्रधान पुजारी शिव शंकर लिंग ने पंचांग पूजन के तहत भगवान मदमहेश्वर सहित तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का आवाहन किया। इसके बाद हक-हकूकधारी गांवों के ग्रामीणों ने चल विग्रह उत्सव डोली का विशेष श्रृंगार कर आरती उतारी। केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग ने प्रधान पुजारी शिव शंकर लिंग को पगड़ी और अचकन पहनाकर छह माह तक मदमहेश्वर धाम में पूजा-अर्चना का संकल्प दिलाया।
ठीक सुबह सात बजे भगवान मदमहेश्वर की डोली ने ओंकारेश्वर मंदिर की परिक्रमा की। इस दौरान मंदिर के प्रधान पुजारी बागेश लिंग और शिव लिंग ने डोली की आरती उतारकर कैलाश के लिए विदा किया। वेद ऋचाओं, मंत्रोच्चारण, भक्तों के जयकारों, महिलाओं के धार्मिक भजनों और स्थानीय वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।
डोली डगवाड़ी, ब्राह्मणखोली, मंगोलचारी, सलामी, फापंज, मनसूना, बुरुवा, राऊलैंक और उनियाणा सहित विभिन्न यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देती हुई रात्रि प्रवास के लिए रासी गांव पहुंची। यहां ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर डोली का स्वागत किया तथा श्रद्धालुओं ने अर्ध्य लगाकर मनौतियां मांगी। देहरादून निवासी गुरु चरण सिंह धीमान, रवि कुकरेजी और अमनदीप सिंह द्वारा रासी गांव में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया।
बताया कि बुधवार को भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली अंतिम रात्रि प्रवास के लिए मदमहेश्वर यात्रा के आधार शिविर गौंडार गांव पहुंचेगी, जबकि 21 मई को वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ मदमहेश्वर धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए श्रद्धालुओं हेतु खोल दिए जाएंगे।
