टिहरी को विकास की सौगात, सतपाल महाराज ने किया 1 अरब 16 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

नई टिहरी। प्रदेश सरकार के “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के तहत जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड जौनपुर स्थित सियाकेम्पटी न्याय पंचायत के रामलीला मैदान में एक भव्य बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और क्षेत्रवासियों को विकास की एक बड़ी सौगात दी। उन्होंने जनपद के लिए कुल एक अरब 16 करोड़ 95 लाख 98 हजार रुपये की लागत वाली विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इन योजनाओं में लोक निर्माण विभाग की 92 करोड़ रुपये से अधिक की नौ परियोजनाएं, सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग की 15 करोड़ से अधिक की सात परियोजनाएं, पर्यटन विभाग की आठ करोड़ की योजना और पंचायती राज विभाग के तहत एक करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पंचायत भवनों का कार्य शामिल है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि 17 दिसंबर से शुरू हुआ यह 45 दिवसीय प्रदेशव्यापी अभियान सुशासन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं और योजनाओं को जनता के घर-द्वार तक पहुंचाना है ताकि आम आदमी को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अभियान से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता भी आएगी।  उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे राष्ट्र भावना से ओत-प्रोत होकर जनसमस्याओं का त्वरित समाधान करें और यह सुनिश्चित करें कि सरकार की कल्याणकारी नीतियों का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।

सतपाल महाराज ने क्षेत्र की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए कृषि और पर्यटन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्व बैंक पोषित जलवायु अनुकूल बागवानी कृषि परियोजना के तहत टिहरी की 87 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है, जिन्हें पूर्ण वित्तीय स्वायत्तता प्रदान की जाएगी। इसके लिए 36 करोड़ 25 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। सड़क कनेक्टिविटी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक 14 हजार से अधिक गांवों को सड़कों से जोड़ा है। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत अब उन बसावटों को भी मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है जो पहले सड़क सुविधा से वंचित थीं। पर्यटन के क्षेत्र में होम स्टे योजना की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पांच हजार से अधिक होम स्टे पंजीकृत हो चुके हैं। साथ ही, आदि कैलाश और लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर दर्शन की योजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

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