दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का संकल्प, खांकर में लगा विधिक और स्वास्थ्य शिविर

नई टिहरी। समाज के हर वर्ग तक न्याय और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता के तहत “विश्व दिव्यांग दिवस” के अवसर पर जनपद के सुदूरवर्ती क्षेत्र में एक विशेष मुहिम चलाई गई। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जनपद न्यायाधीश अमित कुमार सिरोही के दिशा-निर्देशों पर नरेंद्रनगर ब्लॉक के दुर्गम क्षेत्र स्थित राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज खांकर में विधिक जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिविर का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य न केवल दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति चेतना जगाना था, बल्कि ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी था।

शिविर की अध्यक्षता करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव आलोक राम त्रिपाठी ने उपस्थित जनसमूह और छात्र-छात्राओं को विश्व दिव्यांग दिवस की महत्ता समझाई। उन्होंने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि इस दिवस को मनाने का असली मकसद दिव्यांगता से जुड़े मुद्दों पर समाज की समझ को गहरा करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के सम्मान, उनके अधिकारों और कल्याण के लिए पूरे समाज को एकजुट होकर समर्थन जुटाना होगा। सचिव ने संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन के हर पहलू में दिव्यांगजनों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सभ्य समाज की पहचान तभी है जब दिव्यांग व्यक्ति बिना किसी बाधा के, दूसरों के समान और प्रभावी ढंग से जीवन जी सकें।

इस जागरूकता कार्यक्रम में कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए प्राधिकरण के रिटेनर अधिवक्ता राजपाल सिंह मिंया ने भी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम के तहत सड़क सुरक्षा और मुआवजे के प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया। साथ ही, उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्यशैली और आम जनता के लिए उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी दी, ताकि ग्रामीण किसी भी कानूनी अड़चन में प्राधिकरण की मदद ले सकें। शिविर का दूसरा प्रमुख आकर्षण स्वास्थ्य परीक्षण रहा, जहां चिकित्सा विभाग की टीम ने मोर्चा संभाला। चिकित्सा अधिकारी डॉ. नितिन सैनी और डॉ. अर्जुन ओझा के नेतृत्व में स्वास्थ्य कर्मियों ने शिविर में आए लोगों की गहन जांच की। इस दौरान 12 पुरुषों और 50 महिलाओं सहित कुल 62 लोगों का रक्तचाप और मधुमेह (डायबिटीज) का परीक्षण किया गया और उन्हें उचित चिकित्सकीय परामर्श दिया गया।

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