कलश यात्रा के साथ कर्णप्रयाग-जिलासू में मोरारी बापू की रामकथा शुरू।

 

गौचर/चमोली। शनिवार जिलासू में चंडिका देवी मंदिर में पूजन और अलकनंदा नदी तट से जिलासू, कालेश्वर, गिरसा, कालेश्वर की महिला मंगल दल, थारू जनजनजाति की महिलाओं द्वारा भजन-कीर्तन के साथ कलश यात्रा निकाल रामकथा को पहुंचे संत मोरारी बापू का स्वागत किया।

इस अवसर पर विधायक कर्णप्रयाग अनिल नौटियाल ने कहा कि क्षेत्र की जनता का सौभाग्य है कि धार्मिक अनुष्ठान चमोली जनपद में आयोजित हो रहा है। इस मौके पर मोरारी बापू ने कर्णप्रयाग का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा यह वही स्थान है जहां दानवीर कर्ण ने सूर्य की उपासना की। ऐसा भी सुनने में आता है कि इसी क्षेत्र में भरत गुफा स्थित है ऐसे में गंगा-अलकनंदा, संत समाज और देवी-देवताओं को नमन कर नौ दिवसीय अनुष्ठान को कर्णप्रयाग की महिमा के रूप में करेगें।

मोरारी बापू ने कहा कथा का नामकरण मानस कर्णप्रयाग के नाम होगा जिसमें कर्ण अर्थात कान, श्रवण, सुन कर ज्ञान प्राप्ति की महिमा का विस्तार से वर्णन रामचरित मानस के आधार पर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा की जीवन में उद्यम अर्थात कर्म की प्रधानता है और इस कथा को संपन्न करने में मुख्य यजमान के रूप में वाराणसी के कानन बंधुओं का सहयोग सदैव याद रखा जाएगा। कहा कि पहले कथा का स्थल मणिपुर था लेकिन हालत वहां के ठीेक न होने से कर्णप्रयाग में इसका चुनाव किया गया है और देवभूमि में विभिन्न प्रान्तों, एनआरआई का पहुंच अनुष्ठान में शामिल होना श्रवण की महत्ता को दर्शाता है। कथा में वाल्मीकि और तुलसीकृत रामचरित मानस के प्रसंगों को रौचक ढंग से श्रोताओं तक सुनाते हुए मोरारी बापू ने कहा श्रवण की महिमा अद्भुत बतायी गई है और कर्ण अर्थात कान से जो शुभ हो सुनकर जीवन में उतारना हितकारी होता है। प्रभु कहते है मोह कपट, छल-छिद्र न भावा…. जिनके श्रवण समुद्र समाना, कथा तुम्हारी सुभग सरिताना। कहा यहां स्थित पांच प्रयाग, प्रमुख धाम बदरीनाथ की महत्ता है लेकिन जीवन में गुरू के मुख से सदैव हरि नाम का संकीर्तन जहां सुनाई दे करना चाहिए। रामकथा आयोजन की मुख्य संचालक सुरभि शौध संस्थान के सदस्य हरीश चंद्र त्रिपाठी, संयोजक गजेन्द्र कुंवर ने इस मौके पर सभी अतिथियों का आयोजन में भागीदार बनने के लिए प्रेरित किया।

 

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