उत्तराखंड/ न्यू टिहरी । प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के बौराड़ी स्थित सेवा केंद्र द्वारा रविवार को देवभूमि पर्यटन महाअभियान के अंतर्गत ‘मेरी संस्कृति, मेरी पहचान’ विषय पर एक सारगर्भित गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों को न केवल संरक्षित रखना बल्कि उन्हें नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप में पहुँचाना था। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि देवभूमि की पहचान हमारे आचरण, विचारों और जीवन-मूल्यों में ही निहित है, और यदि हम सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें तो इस महान धरोहर को सदैव जीवित रखा जा सकता है।
गोष्ठी का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष इशिता सजवाण ने दीप प्रज्वलित कर किया। ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ी बहनों ने उन्हें पारंपरिक पटका पहनाकर स्वागत किया। अपने संबोधन में इशिता सजवाण ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। यहां की प्राचीन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत, परंपराएँ और सिद्धांत देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान रखते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में विश्वस्तरीय आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर कार्य करना होगा। उन्होंने देवभूमि पर्यटन महाअभियान को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता, ब्रह्माकुमारी के जोनल कोऑर्डिनेटर और वैज्ञानिक बीके पीयूष ने कहा कि उत्तराखंड भारत का मुकुट है और यहां की संस्कृति, प्रकृति तथा परंपराएँ अद्वितीय हैं। उन्होंने कहा कि गंगा नदी का संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक उन्मूलन और गौ संरक्षण हर उत्तराखंडी का प्रमुख कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति की गरिमा बढ़ाने के लिए यह जागरूकता अभियान श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, गोपेश्वर, गुप्तकाशी और ज्योतिर्मठ से होते हुए अब नई टिहरी पहुँचा है, जहाँ लोगों में सांस्कृतिक चेतना जागृत करने का उद्देश्य रखा गया है।
ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन ने अपनी प्रेरक वक्तव्य में कहा कि भारतीय संस्कृति अनुशासन, संयम और संतुलित जीवनशैली पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सुबह जल्दी उठना और रात को समय पर विश्राम करना हमारे स्वास्थ्य और मानसिक शांति दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है, और यह परंपरा सदियों से भारतीय जीवनशैली का हिस्सा रही है।
कार्यक्रम के दौरान बीके अनिता बहन, जीएमवीएन के प्रबंधक मोहनलाल, ज्योति, नेहा, कमल सिंह महर, सोहन सिंह राणा, सचिन सजवाण सहित कई लोग उपस्थित रहे। गोष्ठी में आए सभी वक्ताओं ने सकारात्मक चिंतन, सांस्कृतिक संरक्षण और आध्यात्मिकता को जीवन में अपनाने पर जोर दिया, जिससे देवभूमि की पहचान और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।
