गोपेश्वर। उत्तराखंड की बेटी, मां नंदा अब अपने मायके से ससुराल कैलाश की ओर बढ़ चली हैं। आला गांव में बीती रात का नजारा बेहद भावुक रहा। रातभर बारिश होती रही, लेकिन लोकगीत और जागर थमे नहीं। मायके की महिलाओं ने अपनी बेटी नंदा को लोरी गाकर सुलाया और सुबह आंसुओं के साथ विदा किया।
*आला की विदाई बनी यादगार*
आला गांव के हर घर ने मां नंदा को अपनी बेटी माना। ग्रामीणों ने कहा – “हमारी बेटी सालों बाद मायके आई थी, अब जा रही है तो आंखें भर आना लाजमी है।” श्रद्धालुओं ने बताया कि आला के लोगों ने अपने घरों के दरवाजे सबके लिए खोल दिए, खुद भूखे रहे पर किसी श्रद्धालु को भूखा नहीं सोने दिया।
*कनोल में बेटी जैसा स्वागत*
दोपहर बाद जब मां नंदा की डोली कनोल पहुंची तो पूरे गांव ने बेटी के ससुराल से पहले के आखिरी मायके की तरह स्वागत किया। फूल-मालाओं, ढोल-दमाऊं और मशकबीन की गूंज के बीच कनोल की बुजुर्ग महिलाओं ने मां नंदा की आरती उतारी और उनके सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की।
अब यह कारवां तीन चौसिंघा खाड़ू के साथ कैलाश की ओर बढ़ रहा है, लेकिन हर पड़ाव पर यही एक ही भाव है – बेटी की विदाई का भावुक एहसास।
