उत्तरकाशी। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) की 12वीं वाहिनी मातली में शनिवार को बल का 65वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। वाहिनी परिसर के परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में हिमवीरों ने ध्वज को सलामी दी। इस अवसर पर जवानों, उनके परिजनों और बच्चों के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों को भी आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। वाहिनी के सेनानी सचिन कुमार ने अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों, जवानों और उनके परिवारों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बल की गौरवशाली परंपराओं, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को याद करते हुए हिमवीरों के योगदान की सराहना की।

मीना बाजार में रही रौनक, खेल प्रतियोगिताओं में दिखा उत्साह
स्थापना दिवस के अवसर पर वाहिनी परिसर में मीना बाजार लगाया गया, जहां जवानों और उनके परिजनों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। मनोरंजन के लिए म्यूजिकल चेयर, सुई-धागा दौड़, रस्साकशी, नींबू दौड़, बोरा दौड़ और बच्चों के लिए जलेबी दौड़ सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। आयोजन के दौरान वाहिनी परिसर में उत्साह और उल्लास का माहौल रहा।
पूर्व सैनिकों से मुलाकात कर जाना कुशलक्षेम
समारोह में पूर्व सैनिकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। सेनानी सचिन कुमार ने उनसे मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने पूर्व सैनिकों को समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करने का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम के समापन पर जवानों और पूर्व सैनिकों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई।
इस अवसर पर कमांडेंट सचिन कुमार, सीएमओ सरबजीत सिंह, उप कमांडेंट संदीप भंडारी, मंगय राम, अंकित कुमार सहित वाहिनी के अधिकारी और जवान मौजूद रहे। सेवानिवृत्त सुंदर सिंह कुंद्रा, कृपाल सिंह, जयपाल सिंह और सुंदर मणि जोशी सहित अन्य पूर्व सैनिक भी समारोह में शामिल हुए।
भारत-चीन युद्ध के बाद हुआ था आईटीबीपी का गठन
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल का गठन 24 अक्टूबर 1962 को भारत-चीन युद्ध के बाद देश की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था। प्रारंभ में चार बटालियनों के साथ स्थापित यह बल आज भारत-चीन सीमा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बल लद्दाख के काराकोरम दर्रे से अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा की निगरानी करता है।
आईटीबीपी के हिमवीर अत्यधिक ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी देश की सीमाओं की निगरानी करते हैं। सीमा सुरक्षा के साथ-साथ बल आंतरिक सुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
