45 साल की शोध के बाद बड़ा दावा: विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी, 162 करोड़ लोग जानते हैं हिंदी – डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल का शोध

वैश्विक हिंदी शोध संस्थान के महानिदेशक डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल की 45 वर्षीय शोध रिपोर्ट 2026 में दावा किया गया है कि हिंदी विश्व में प्रथम भाषा है। एथ्नोलॉग के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए 162.6 करोड़ हिंदी जानने वालों की संख्या बताई गई है।

 देहरादून। हिंदी माह के अवसर पर हिंदी भाषा को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली शोध रिपोर्ट सामने आई है। वैश्विक हिंदी शोध संस्थान के महानिदेशक डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल ने 45 वर्षों की लंबी शोध के बाद दावा किया है कि हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है।
डॉ. नौटियाल की शोध रिपोर्ट 2026 का 21वां संस्करण हाल ही में जारी किया गया है। इस शोध के अनुसार विश्व में हिंदी जानने वालों की संख्या 162.6 करोड़ है, जो अंग्रेजी के 150 करोड़ और मंदारिन चीनी के 120 करोड़ से अधिक है।
*1981 में शुरू हुई थी यह शोध*
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह शोध 1981 में शुरू हुआ था और इसका पहला संस्करण 1983 में विश्व हिंदी सम्मेलन दिल्ली में वितरित किया गया था। शोधकर्ता के अनुसार यह विश्व में हिंदी पर सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला व्यक्तिगत शोध है, जिसने जॉर्ज ग्रियर्सन के 34 वर्षीय लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया को भी पीछे छोड़ दिया है।
यह शोध भारत सरकार के कॉपीराइट अधिनियम के तहत वर्ष 2006 में पंजीकृत है, जिसका पंजीयन नंबर L-26910/2006 है।
*अंग्रेजी को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है – शोध रिपोर्ट*
शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अंग्रेजी को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। लोक फाउंडेशन एवं ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के माध्यम से कराए गए सर्वे का हवाला देते हुए बताया गया कि भारत में केवल 6 प्रतिशत जनता ही अंग्रेजी जानती है, जबकि 26 प्रतिशत का आंकड़ा भ्रामक है।
सर्वे के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 12% और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 3% लोग ही अंग्रेजी जानते हैं। 147 करोड़ की आबादी में यह संख्या लगभग 9.42 करोड़ ही बैठती है।

*एथ्नोलॉग की गणना पर उठाए सवाल*

शोध में विश्व की भाषाओं की रैंकिंग करने वाली संस्था ‘एथ्नोलॉग’ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एथ्नोलॉग अंग्रेजी के सभी रूपों को गिनती है, लेकिन हिंदी में उर्दू जानने वालों को शामिल नहीं करता, जबकि हर उर्दू भाषी हिंदी समझता और बोलता है।
*शोध को मिले कई प्रमाणीकरण*
विज्ञप्ति के अनुसार इस शोध रिपोर्ट के अब तक 41 चरणों में प्रमाणीकरण हो चुके हैं, जिसमें 1418 भाषा विशेषज्ञ शामिल रहे हैं।
नवीनतम प्रमाणीकरण में उत्तराखंड भाषा संस्थान, कर्नाटक विश्वविद्यालय धारवाड़, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय भोपाल, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति भोपाल और हैदराबाद की ‘राजभाषा चौपाल’ जैसी संस्थाओं की विशेषज्ञ समितियों ने इस शोध को प्रामाणिक बताया है।
शोध से संबंधित 3557 दस्तावेज 13 खंडों में वैश्विक हिंदी शोध संस्थान में उपलब्ध हैं।
*शोधकर्ता का परिचय*
डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल का जन्म 3 मार्च 1956 को देहरादून में हुआ था। वे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से उप महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्हें हिंदी साहित्य के लिए 121 से अधिक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं और राष्ट्रपति भवन में दो राष्ट्रपतियों द्वारा सम्मानित होने का गौरव भी प्राप्त है।

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