देहरादून । राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने रविवार को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के अवसर पर रेंजर्स ग्राउण्ड देहरादून में आयोजित सहकारिता मेले के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। राज्यपाल ने मेले में विभिन्न स्टालों का अवलोकन करने के साथ-साथ सभा को संबोधित भी किया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि सहकार का अर्थ है मिलकर कार्य करना। सहकारिता आंदोलन एक के लिए सब और सब के लिए एक की धारणा को परिलक्षित करता है। जहाँ ‘मैं’ खत्म होता है, वहीं से ‘हम’ शुरू होता है, और उसी का नाम है सहकारिता। उन्होने कहा कि हमारे देश में सहकारिता कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन दर्शन का अभिन्न अंग रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे यहाँ प्राचीन काल से ही समूह जीवन की परंपरा रही है। ग्रामसभा, पंचायती व्यवस्था, सिंचाई के लिए सामूहिक तालाब, मंदिर एवं विद्यालय निर्माण के लिए सामूहिक योगदान- ये सब सहकारिता की ही देन हैं। उन्होने कहा कि सहकारिता केवल उत्पादन या वितरण तक सीमित नहीं, यह गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता, सतत आजीविका, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे 17 सतत विकास लक्ष्यों की पूर्ति में सीधा योगदान देती है।इस अवसर पर राज्यपाल ने उपस्थित जनसमूह को यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि हर गाँव में एक सशक्त सहकारी समिति बने, हर परिवार सहकारिता से जुड़कर आत्मनिर्भर बने, हर युवा सहकारिता को अवसर का मंच बनाए। उन्होने कहा कि इन्हीं संकल्पों के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरा होगा और इस दिशा में हमारे सामूहिक प्रयासों से, सहकारिता से समृद्धि आएगी और समृद्धि से विकसित भारत/2047 का संकल्प साकार होगा।
राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड देश का एकमात्र राज्य है जिसने सहकारी समितियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। हमारे महिला स्वयं सहायता समूह न केवल परिवार की आर्थिक रीढ़ बने हैं, बल्कि उद्यमिता में भी नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। उन्होने कहा कि यह गर्व का विषय है कि उत्तराखण्ड की सहकारी समितियाँ सेना, आईटीबीपी और अन्य अर्धसैनिक बलों को खाद्यान्न, डेयरी और अन्य आवश्यक वस्तुएँ आपूर्ति कर रही हैं। यह न केवल राज्य की सहकारिता की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीय सेवा में योगदान का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।
