देहरादून। राजधानी देहरादून अब सिर्फ आधुनिक शहर के रूप में ही नहीं, बल्कि अपनी पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ भी पहचानी जाएगी। शहर के ऐतिहासिक और हेरिटेज भवनों को बचाने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने एक बड़ा प्लान तैयार किया है।
इसको लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई, जिसमें इंटेक (INTACH), द्रोणा फाउंडेशन और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
DM ने कहा- विकास और विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं
बैठक में डीएम ने साफ कहा कि “विकास और विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं।” देहरादून का विकास सिर्फ फ्लाईओवर और बिल्डिंगों तक सीमित नहीं होना चाहिए। शहर की ऐतिहासिक पहचान को बचाना भी उतना ही जरूरी है। असली प्रगति वही है जो आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों का भी सम्मान करे।

क्या है पूरी योजना? 3 बड़े फैसले
1. अक्टूबर में होगी बड़ी कार्यशाला- डीएम ने हिस्टोरिक सिटी सीरीज-2026 के तहत सभी विरासत स्थलों का पूर्ण दस्तावेजीकरण करने के निर्देश दिए। अक्टूबर में एक विशेष कार्यशाला आयोजित कर महत्वपूर्ण स्थलों को शहर की टाउन प्लानिंग में शामिल किया जाएगा।
2. DPR बनाकर शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव- चयनित स्थलों के संरक्षण के लिए जल्द कंसल्टेंट हायर कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी और अंतिम मंजूरी के लिए शासन को भेजी जाएगी।
3. 200 ऐतिहासिक संपत्तियां चिन्हित- इंटेक और द्रोणा फाउंडेशन ने बताया कि शहर भर में घूम-घूमकर पहले चरण में 200 ऐतिहासिक परिसंपत्तियों को चिन्हित कर लिया गया है। कार्यशाला के बाद इनके लिए विस्तृत कार्ययोजना बनेगी।

डीएम ने कहा कि देहरादून की ये धरोहरें आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य हैं और इनके संरक्षण के लिए प्रशासन, विशेषज्ञ और आम जनता को मिलकर काम करना होगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रेट हर्षिता सिंह, जिला पर्यटन अधिकारी जशपाल चौहान सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
