विशेष प्रशिक्षण केंद्र बीआईएएटी डोईवाला बना उत्सव का मुख्य आकर्षण
डोईवाला। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 61वें स्थापना दिवस पर डोईवाला स्थित साहसिक प्रशिक्षण संस्थान बीआईएएटी परिसर में आयोजित समारोह ने इस बार ‘सीमा से सेवा’ के नए दृष्टिकोण को केंद्र में रखा। कार्यक्रम में देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ आधुनिक प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता और मानवीय दृष्टिकोण को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया।
बीएसएफ का यह स्थापना दिवस केवल ऐतिहासिक यात्रा को याद करने का अवसर नहीं रहा, बल्कि आने वाले समय में बल की चुनौतियों और तैयारी को भी उजागर करता दिखा। बीआईएएटी परिसर में हुई गतिविधियों ने यह संदेश दिया कि देश की सीमाएं आज तकनीक, कौशल और सतर्कता के नए समन्वय से सुरक्षित हैं।
कार्यक्रम में भाग लेने आए कार्यरत एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बल के अनुभवों और नए परिवर्तनों पर चर्चा की। परिसर में आयोजित एडवेंचर डेमो, आधुनिक हथियारों की प्रदर्शनी और रणनीतिक अभ्यासों ने दर्शकों को बीएसएफ की वर्तमान कार्यशैली से रूबरू कराया।
स्थापना दिवस पर संबोधित करते हुए कमांडेंट गजेंद्र सिंह रावत ने कहा कि आज सीमा सुरक्षा केवल भौगोलिक सीमाओं की सुरक्षा नहीं, बल्कि साइबर, ड्रोन और हाई-टेक निगरानी जैसे आधुनिक मोर्चों तक विस्तृत हो चुकी है। बीआईएएटी ऐसे ही उन्नत प्रशिक्षण में देशभर के जवानों को तैयार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि बल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है और आंतरिक सुरक्षा के अनेक मोर्चों पर अभी भी अग्रणी भूमिका में है। रावत ने कहा कि सीमाओं पर कार्यरत जवानों की प्रतिबद्धता और साहस ने ही बीएसएफ को विश्व की सबसे बड़े सीमा बलों में शामिल किया है।
समारोह में उप-कमांडेंट हेमंत कोठियाल, उप-कमांडेंट लवराज सिंह, सहायक कमांडेंट राकेश चंद्र भट्ट, सहायक कमांडेंट विकास तथा डॉ. मनोज कुमार समेत कई अधिकारी शामिल रहे। समारोह के अंत में शांति, सुरक्षा और सेवा की भावना के साथ भविष्य के लिए प्रतिबद्धता दोहराई गई।
