चम्पावत को बड़ी सौगात: मुख्यमंत्री धामी ने ₹300 करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं का किया शिलान्यास


चम्पावत।
माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चम्पावत के समग्र विकास को गति देते हुए ₹300 करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का शिलान्यास एवं भूमि पूजन किया। इन योजनाओं से जिले में सड़क, शिक्षा, पर्यटन, शहरी विकास, आपदा प्रबंधन एवं आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया जाएगा।

शारदा रिवर फ्रंट सहित कई बड़ी योजनाओं का शिलान्यास

मुख्यमंत्री द्वारा शिलान्यासित प्रमुख कार्यों में शारदा घाट पुनर्विकास (प्रथम चरण) ₹10,735 लाख, सिटी ड्रेनेज प्लान (प्रथम चरण) ₹6,649 लाख, नायरदृखेरा क्षेत्र में डिजास्टर रेजिलिएन्स हेतु इकोलॉजिकल कॉरिडोर विकास ₹8,523 लाख, टनकपुर-अस्कोट सीसी मार्ग पुनर्निर्माण ₹115 लाख, चम्पावत–खेतीखान मोटर मार्ग (एसएच-64) के अंतर्गत सुयालखर्क–पुनावे मिलान मार्ग सुधारीकरण ₹320 लाख शामिल हैं।

इसके साथ ही माँ पूर्णागिरि घाटी (चूका क्षेत्र) में हेलीपैड निर्माण ₹187 लाख, धूनाघाट–बसौट मोटर मार्ग नवनिर्माण ₹83 लाख, कामज्यूला–भनार–रैघाड़ी मोटर मार्ग सुधारीकरण ₹666.84 लाख, सांगो–घिंघारूकोट–बांस बसवाड़ी मोटर मार्ग पुनर्निर्माण ₹89.36 लाख तथा बाढ़ व भू-कटाव सुरक्षा कार्य भी शामिल हैं।

शिक्षा व संस्थागत ढांचे को मिलेगी मजबूती

शिक्षा के क्षेत्र में स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लोहाघाट में परीक्षा हॉल निर्माण ₹672.11 लाख, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, चम्पावत परिसर में केंद्रीय पुस्तकालय, चहारदीवारी एवं मिनी स्टेडियम निर्माण ₹2,045.78 लाख, कस्तूरबा गांधी छात्रावास टनकपुर का विस्तारीकरण ₹384.50 लाख तथा जिला कमांडेंट होमगार्ड्स कार्यालय भवन निर्माण ₹224.71 लाख के कार्य शामिल हैं।

शारदा कॉरिडोर बनेगा विकास का आधार : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि शारदा रिवर फ्रंट (शारदा कॉरिडोर) परियोजना चम्पावत के सर्वांगीण विकास का आधार बनेगी और जिले को पर्यटन, आस्था और आधुनिक शहरी सुविधाओं के मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगी।

उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से सीमांत क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं, किसानों, विद्यार्थियों व पर्यटकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

आस्था, संस्कृति और विकास का संतुलन जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्पावत आस्था, संस्कृति और इतिहास से समृद्ध भूमि है। माँ शारदा ज्ञान, विद्या और संस्कार की प्रतीक हैं और उनके पावन धाम के घाटों का विकास करना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि विकास और सांस्कृतिक विरासत के संतुलन से ही उत्तराखण्ड की पहचान और मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से जनभागीदारी, सांस्कृतिक संरक्षण और विकास के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि चम्पावत आने वाले समय में एक आदर्श, सशक्त एवं आत्मनिर्भर जनपद के रूप में स्थापित होगा।

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