शीतकाल के लिए बंद हुए श्री भू-बैकुण्ठ धाम के कपाट।

 

चमोली। बद्रीनाथ धाम के कपाट पूर्ण विधि विधान, वैदिक परम्परा एवं मंत्रोचारण के साथ शीतकाल के लिए बन्द कर दिए गए। पंच पूजाओं के साथ शुरू हुई कपाट बंद होने की प्रक्रिया के अंतिम दिन भगवान नारायण की विशेष पूजा अर्चना की गई। मुख्य पुजारी रावल जी, मंदिर समिति के सदस्यों एवं सहस्त्रों श्रद्वालुओं की मौजूदगी में भगवान श्री बद्री विशाल जी के कपाट इस वर्ष शीतकाल के लिए बंद किए गए। कपाट बंद होते समय आर्मी के मधुर बैंड ध्वनि ने सबको भावुक कर दिया। कपाट बंद होने से पूर्व भगवान को घृत कम्बल पहनाया गया। इस अवसर पर हजारों श्रद्वालु श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की अलौकिक बेला के साक्षी बने। मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी नम्बूदरी ने इस वर्ष की अंतिम पूजा की। कपाट बंद होने का माहौल अत्यंत धार्मिक मान्यताओं, परम्पराओं के साथ हुआ। कपाट बंद होने के अवसर पर बडी संख्या में श्रद्वालुओ ने पूरे भाव भक्ति से भगवान बद्री विशाल के दर्शन किए।

आंकडों के अनुसार इस वर्ष 17,59,121 श्रद्वालु भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों के लिए बद्रीनाथ पहुँचे, जिनको पुलिस एवं एसडीआरएफ द्वारा सकुशल दर्शन कराकर अपने गन्तव्य तक पहुँचाया गया। श्री बद्रीनाथ धाम पहुँचे सभी श्रद्धालुओं द्वारा जनपद पुलिस का आभार प्रकट करते हुए मुक्त कण्ठ से प्रसंशा की गई।

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