ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: 10 साल से विस्थापन का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने रुकवाया टनल निर्माण

रुद्रप्रयाग। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत रतूड़ा-बड़ेथी क्षेत्र में टनल निर्माण से प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया है। पिछले दस वर्षों से विस्थापन, पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग कर रहे ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए टनल निर्माण कार्य रुकवा दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।  ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से विस्थापन के लिए तीन स्थान चिह्नित किए गए, लेकिन आज तक प्रभावित परिवारों को जमीन आवंटित नहीं की गई। ग्रामीणों के मुताबिक, रेलवे की ओर से करीब सवा करोड़ रुपये जिला प्रशासन को भेजे जाने की जानकारी भी मिली है, लेकिन पुनर्वास प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

ग्रामीणों ने बताया कि टनल निर्माण के चलते कई मकानों में दरारें आ गई हैं और कुछ भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके बावजूद मरम्मत के नाम पर महज दो से ढाई हजार रुपये दिए गए। उन्होंने प्रभावित भवनों का विशेषज्ञों से तकनीकी सर्वेक्षण कराकर वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा देने की मांग की।

आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार और उपाध्यक्ष त्रिभुवन चौहान ने कहा कि ग्रामीण विकास परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के घर और सुरक्षित भविष्य से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रभावित परिवारों का तत्काल पुनर्वास करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग उठाई।

ग्रामीणों ने प्रशासन से जमीन आवंटन की स्थिति स्पष्ट करने, रेलवे से मिली धनराशि का हिसाब सार्वजनिक करने, क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वेक्षण कराने, उचित मुआवजा देने और असुरक्षित मकानों में रह रहे परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की मांग की।

आंदोलन में आनंद लाल, धर्म लाल, गुड्डी देवी, विशम्भरी देवी, सरोजनी देवी, भुवनेश्वरी देवी, राजू लाल, सुशीला देवी, गणेशी देवी, महेश, लक्ष्मण, संदीप और हरीश सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कार्रवाई चाहिए।

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