भारत-चीन युद्ध के बाद 24 अक्टूबर 1962 को हुआ था बल का गठन, सीमाओं की सुरक्षा के साथ आपदा राहत और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में भी निभा रहा अहम भूमिका
गौचर (चमोली)। गौचर स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) परिसर में आठवीं वाहिनी ने बल का 65वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर वाहिनी के सेनानी मनोहर रावत ने परेड की सलामी ली। उन्होंने परिसर में उपस्थित अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों, जवानों और उनके परिजनों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं।

1962 में हुआ था ITBP का गठन
स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए सेनानी मनोहर रावत ने कहा कि वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद देश की उत्तरी सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 24 अक्टूबर 1962 को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल का गठन किया गया था।
उन्होंने कहा कि इन वर्षों में बल के अधिकारियों और जवानों ने कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए बल का गौरव बढ़ाया है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों में सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों और आंतरिक सुरक्षा में भी बल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में भी निभा रहा भूमिका
सेनानी मनोहर रावत ने कहा कि ITBP सीमाओं की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में भी योगदान दे रहा है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए बल प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बल के जवानों के समर्पण और कर्तव्यपरायणता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों में जनकल्याण से जुड़े कार्यों में बल के कार्मिक निरंतर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
परेड के साथ हुआ समारोह का समापन
स्थापना दिवस समारोह के दौरान परेड कमांडर के नेतृत्व में परेड का निष्क्रमण हुआ। कार्यक्रम में उप सेनानी यायति कुमार बेहेरा, द्वितीय कमान (वेटरनरी) डॉ. गौतम कुमार पंकज सहित वाहिनी के एनसीओ और बड़ी संख्या में जवान मौजूद रहे।
