हरिद्वार में मगध साइबर गैंग के ऋषिकेश नेटवर्क का खुलासा, बलिया निवासी सागर पाण्डेय गिरफ्तार

 

 

हरिद्वार/ऋषिकेश। साइबर ठगी के खिलाफ हरिद्वार पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कोतवाली श्यामपुर पुलिस और सीआईयू हरिद्वार की संयुक्त टीम ने मगध साइबर गैंग के ऋषिकेश नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए बलिया निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए गैंग को बैंक खाते उपलब्ध कराता था।

 

डिजिटल सर्विलांस से गिरफ्त में आया आरोपी

 

पुलिस के मुताबिक, कोतवाली श्यामपुर में दर्ज मुकदमा संख्या 100/2026 में वांछित सागर पाण्डेय, मूल निवासी सिकंदरपुर, जिला बलिया, उत्तर प्रदेश, को तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ऋषिकेश के चंद्रेश्वर रोड, मायाकुंड क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

 

बताया गया कि आरोपी काले रंग की स्कूटी से जा रहा था। इसी दौरान पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।

 

18 बैंक खाते गैंग को उपलब्ध कराने का आरोप

 

पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि सागर पाण्डेय ऋषिकेश में रहकर पहले गिरफ्तार किए जा चुके मगध साइबर गैंग के सरगना कृष्णा पाण्डेय के संपर्क में था।

 

आरोप है कि सागर लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद इन खातों को साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेनदेन के लिए गैंग को उपलब्ध कराया जाता था।

 

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने विशाल और श्याम नामक व्यक्तियों के कुल 18 बैंक खाते गैंग को उपलब्ध कराए थे। इसके बदले वह कमीशन लेता था।

 

गिरफ्तारी की भनक लगते ही डिलीट किए चैट और कॉल रिकॉर्ड

 

पुलिस के मुताबिक, गैंग से जुड़े साथियों की गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद सागर पाण्डेय ने अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्ड और कई मोबाइल नंबर डिलीट कर दिए थे।

 

हालांकि तकनीकी जांच में पुलिस को मोबाइल की गैलरी से एक बैंक खाते की फोटो समेत महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से रियलमी कंपनी का मोबाइल फोन और बैंक खातों व चैट से संबंधित रिकवर्ड डिजिटल दस्तावेज भी बरामद किए हैं।

 

इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका

 

कार्रवाई में थानाध्यक्ष नितेश शर्मा, चौकी प्रभारी चंडीघाट देवेंद्र सिंह तोमर, कांस्टेबल विनित कुमार, राहुल देव और सीआईयू हरिद्वार की टीम के कांस्टेबल वसीम शामिल रहे।

 

हरिद्वार पुलिस के अनुसार साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के नेटवर्क के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। पुलिस गैंग से जुड़े अन्य लोगों और बैंक खातों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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