नई दिल्ली/ उत्तराखंड। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उत्तराखंड की सड़क एवं आधारभूत संरचना से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं पर चर्चा की। बैठक में राज्य की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति और सैद्धांतिक सहमति मिली।
बैठक में केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF) के तहत वर्ष 2026-27 के लिए उत्तराखंड की लगभग 750 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी देने पर सहमति बनी। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग (NHO) के अंतर्गत करीब 2,966 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच प्रमुख परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

स्वीकृत परियोजनाओं में श्रीनगर बाईपास का पीएमसी, पुरकाजी-लक्सर-हरिद्वार फोरलेन, लोहाघाट एवं पिथौरागढ़ बाईपास की एलाइनमेंट, मझोला-खटीमा आबादी क्षेत्र का चार लेन विस्तार तथा रामनगर-रानीखेत (मोहन) मार्ग का सुदृढ़ीकरण शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025-26 तक की 530.11 करोड़ रुपये की लंबित प्रतिपूर्ति राशि शीघ्र जारी करने का भी अनुरोध किया।
अर्धकुंभ-2027 को लेकर हरिद्वार और कोटद्वार बाईपास पर जोर
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले को देखते हुए हरिद्वार बाईपास परियोजना को समयबद्ध ढंग से पूरा करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे यातायात का दबाव कम होगा और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही कोटद्वार बाईपास के निर्माण कार्य में तेजी लाने का भी आग्रह किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सहमति जताई।
3,000 करोड़ की नई सड़क परियोजनाओं को मिली सैद्धांतिक सहमति
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्गों को स्पर मार्गों से जोड़ने के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी देने का अनुरोध किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक सहमति दी। इसके अलावा अल्मोड़ा सिकुड़ा बैंड से एनएच-309 तक टनल सहित मोटर मार्ग के निर्माण के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये की परियोजना पर भी सैद्धांतिक सहमति बनी।

भूस्खलन प्रबंधन और बीआरओ परियोजनाओं पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन मैनेजमेंट सेंटर (ULMMC) के माध्यम से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के वैज्ञानिक उपचार के लिए डीपीआर तैयार करने हेतु एमओयू का प्रस्ताव रखा, जिसे मंत्रालय ने स्वीकृति प्रदान की।
इसके अलावा उन्होंने सीमा सड़क संगठन (BRO) की लंबित परियोजनाओं, विशेषकर ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के हिना-तेखला-नेताला-गरमपानी खंड की डीपीआर तथा जोशीमठ बाईपास के संशोधित प्रस्तावों को शीघ्र मंजूरी देने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों को गति देने के लिए अत्यंत कम दरों पर प्राप्त निविदाओं से संबंधित अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की व्यवस्था में संशोधन की आवश्यकता भी उठाई।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से उत्तराखंड में सड़क संपर्क मजबूत होगा, सीमांत क्षेत्रों का विकास तेज होगा, पर्यटन और आपदा प्रबंधन क्षमता में वृद्धि होगी तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव बृजेश कुमार संत, स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
