हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज में दधीचि अंगदान संकल्प अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पुष्कर सिंह धामी ने जे. पी. नड्डा की उपस्थिति में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर देशभर से आए विशेषज्ञों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं साधकों ने अंगदान के महत्व पर विचार रखे तथा अनेक लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया।
केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि अंगदान मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य है, जो जरूरतमंद लोगों को नया जीवन प्रदान करता है। उन्होंने अंगदान को वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से समझने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केंद्र सरकार अंगदान एवं प्रत्यारोपण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत ढांचे का विस्तार कर रही है। उन्होंने बताया कि जागरूकता बढ़ने से देश में अंगदान की संख्या में वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति त्याग, सेवा और परमार्थ की भावना पर आधारित है। उन्होंने महर्षि दधीचि एवं राजा शिवि के त्याग का उल्लेख करते हुए कहा कि मृत्यु के बाद भी अंगदान के माध्यम से किसी व्यक्ति को नया जीवन देना सबसे बड़ा मानव कल्याण है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में अंगदान एवं प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अंग प्रत्यारोपण केंद्र, अंग बैंक तथा जिला स्तरीय अंगदान केंद्रों का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। साथ ही दून मेडिकल कॉलेज में राज्य के प्रथम सरकारी ऊतक प्रत्यारोपण केंद्र की स्थापना की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आध्यात्मिक चेतना एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के संदेश “हम बदलेंगे तो युग बदलेगा” को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग, सहयोग और लोकमंगल की भावना को जागृत करने वाली जीवन पद्धति है।
संगोष्ठी में मदन कौशिक, स्वामी दयामूर्त्यानंद, डॉ. अनिल कुमार, नीलेश मांडलेवाला तथा डॉ. विजय धस्माना सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे। अंत में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिभागियों को अंगदान का संकल्प दिलाया गया।
