देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने गुरुवार को परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में “दालचीनी प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का शुभारंभ किया।
अपने संबोधन में कृषि मंत्री ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार से उत्तराखंड की दालचीनी को वैश्विक पहचान मिलेगी तथा किसानों को आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञों के अनुभवों का लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की महक कान्ति नीति के तहत दालचीनी की खेती को वैज्ञानिक ढंग से विकसित किया जाएगा।
कार्यक्रम में Sri Lanka, Indonesia और India के प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, एरोमा उद्योगों के प्रतिनिधि तथा दालचीनी की खेती करने वाले किसान शामिल हुए। सेमिनार का उद्देश्य किसानों को उन्नत उत्पादन तकनीकों, प्रसंस्करण और विपणन की जानकारी उपलब्ध कराना है।
कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डे ने बताया कि महक कान्ति नीति के अंतर्गत दालचीनी सहित विभिन्न सुगंधित फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीति तैयार की गई है। इसके सफल क्रियान्वयन से राज्य के सुगंधित कृषि क्षेत्र का वार्षिक कारोबार 1180 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

संस्थान के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान ने बताया कि उत्तराखंड महक कान्ति नीति 2026-36 के अंतर्गत जनपद नैनीताल और चम्पावत में 5,200 हेक्टेयर क्षेत्र में दालचीनी की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे लगभग 20,800 किसान लाभान्वित होंगे।
कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। उन्होंने काशीपुर में विकसित किए जा रहे एरोमा पार्क की प्रगति की जानकारी देते हुए प्रोत्साहन योजनाओं के दायरे को और बढ़ाने का सुझाव दिया।
तकनीकी सत्र में श्रीलंका और इंडोनेशिया से आए विशेषज्ञों ने दालचीनी की उन्नत नर्सरी तकनीक, उत्पादन प्रणाली और वैश्विक बाजार की संभावनाओं पर व्याख्यान दिए। वहीं ICAR के विशेषज्ञों ने आधुनिक कृषि पद्धतियों और उन्नत एग्रोनॉमिक तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए।
सेमिनार के दौरान दालचीनी आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें भारत, श्रीलंका और इंडोनेशिया के विभिन्न उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में कृषि, उद्यान, रेशम, बायोटेक समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी, वैज्ञानिक और किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
