न्यायाधीश ने चकराता क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ वातावरण की जमकर की सराहना

चकराता। महाराष्ट्र हाईकोर्ट के न्यायाधीश श्रीराम मधुसूदन मोदक ने पांच दिवसीय चकराता प्रवास के दौरान क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ वातावरण और शांत माहौल की जमकर सराहना की। शनिवार को वापस लौटने से पूर्व उन्होंने कहा कि चकराता देश के सबसे सुरक्षित, स्वच्छ और प्राकृतिक रूप से समृद्ध हिल स्टेशनों में से एक है।
करीब पांच दिन पहले चकराता पहुंचे न्यायाधीश मोदक ने अपनी सादगी से सभी को प्रभावित किया। देहरादून से उनकी अगवानी के लिए पहुंची सरकारी फ्लीट और सुरक्षा व्यवस्था को उन्होंने वहीं से वापस भेज दिया।

उनका कहना था कि चकराता पूरी तरह सुरक्षित स्थान है और यहां किसी विशेष सुरक्षा या लाव-लश्कर की आवश्यकता नहीं है। चकराता पहुंचने के बाद भी उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को लौटाकर अपनी पत्नी के साथ सामान्य पर्यटक की तरह क्षेत्र का भ्रमण किया। प्रवास के दौरान उन्होंने कोटी कनासर, लोखंडी, टाइगर फॉल, नागथात और बेराटखाई समेत कई पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। साथ ही बिसोई स्थित महासू देवता मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर मंदिर समिति की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया गया।

टूरिस्ट डेवलपमेंट एवं होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिगम्बर चैहान ने बताया कि न्यायाधीश मोदक चकराता के किमोना स्थित होटल हिमालयन पैराडाइज में ठहरे थे। उन्होंने बताया कि न्यायाधीश ने कहा कि वह देश-विदेश के अनेक प्रसिद्ध हिल स्टेशनों का भ्रमण कर चुके हैं, लेकिन चकराता की शुद्ध हवा, शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य उन्हें बेहद खास लगा। उन्होंने कहा कि चकराता अभी भी एक अनछुआ पर्यटन स्थल है, जहां की प्राकृतिक छटा सहज ही पर्यटकों को आकर्षित करती है। साथ ही जौनसार-बावर की समृद्ध लोक संस्कृति और यहां पर्यटन की अपार संभावनाओं की भी उन्होंने सराहना की। न्यायाधीश ने कहा कि जब भारत में ही इतने खूबसूरत और मनमोहक पर्यटन स्थल मौजूद हैं तो लोगों को विदेश जाने की आवश्यकता नहीं है।

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