हरिद्वार।
हरिद्वार के शिवालिकनगर स्थित कुमाऊँनी एकता समिति द्वारा आयोजित भव्य होली मिलन समारोह में कुमाऊँ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे प्रखर कथावाचक स्वामी हरिचेतानंद महाराज एवं मां संतोषी माता ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
संगठन ही सबसे बड़ी शक्ति
अपने संबोधन में मां संतोषी माता ने समाज की एकजुटता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि “कलयुग में संगठन ही सबसे बड़ी शक्ति है। जिस प्रकार मजबूत रस्सी से कुएं से जल निकाला जा सकता है, उसी प्रकार संगठित समाज असंभव कार्यों को भी संभव बना सकता है।” उन्होंने कुमाऊँनी समाज की सरलता और निष्कपटता की सराहना करते हुए एक सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया।
स्वामी हरिचेतानंद महाराज ने कहा कि वर्तमान समय संचय का नहीं, बल्कि सेवा और वितरण का है। उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए एक स्थायी ‘कोष’ (फंड) बनाने का सुझाव दिया।
खड़ी और बैठकी होली ने बांधा समां
गणेश वंदना और मंगलाचरण के साथ आरंभ हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम में कुमाऊँ की प्रसिद्ध ‘खड़ी होली’ और ‘बैठकी होली’ की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कृपाल नगर, शिवालिक नगर और हरि आश्रय कॉलोनी के महिला-पुरुष समूहों ने पारंपरिक होली गायन से माहौल को रंगमय बना दिया।
नृत्य प्रस्तुतियों ने बटोरीं तालियां
सान्वी मर्तोलिया, इशानी मर्तोलिया, हर्षिता चंद, खुशी जीना, काजल साही और मेघा राणा के आकर्षक नृत्यों ने दर्शकों की खूब सराहना पाई। इंशिता बसेड़ा के एकल नृत्य तथा ‘दीप गंगा’ समूह के ‘पहाड़ी फ्यूजन’ ने आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। कोमल, प्रियंगा और कुवेगी की प्रस्तुतियां भी विशेष आकर्षण रहीं।
‘मिनी कुमाऊँ’ की पहचान
समिति पदाधिकारियों ने बताया कि संगठन का उद्देश्य हरिद्वार में ‘मिनी कुमाऊँ’ की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाए रखना और नई पीढ़ी को लोक कला, संगीत एवं पारंपरिक त्योहारों से जोड़ना है। समिति शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी वंचित वर्गों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक कुमाऊँनी व्यंजनों का आनंद लिया।
