देहरादून। UPES ने हेस्को के सहयोग से पर्यावरणीय शिक्षा पर राष्ट्रीय स्तर की एक एक्सपर्ट वर्कशॉप आयोजित की। वर्कशॉप में अकादमिक लीडर्स, सस्टेनेबिलिटी एक्सपर्ट्स और पॉलिसीमेकर शामिल हुए, ताकि भारतीय उच्च शिक्षा में सस्टेनेबिलिटी को व्यावहारिक और लागू करने योग्य ‘करिकुलम फ्रेमवर्क’ के रूप में समाहित किया जा सके।
कार्यक्रम में पारंपरिक सेमिनार की बजाय हाई-इम्पैक्ट, आउटकम-ओरिएंटेड बिल्ड रूम का स्वरूप अपनाया गया। चर्चा का फोकस केवल अवेयरनेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्रों को एयर, वॉटर, सॉयल, फॉरेस्ट और इकोसिस्टम्स से जुड़े रियल प्रॉब्लम-सॉल्विंग और फील्ड इमर्शन के माध्यम से प्रशिक्षित करने पर रहा।
इस अवसर पर हेस्को के फाउंडर डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, UPES वाइस-चांसलर डॉ. सुनील राय, नैक चेयरमैन डॉ. अनिल डी. सहस्रबुद्धे सहित कई वरिष्ठ शिक्षाविद और विशेषज्ञ उपस्थित रहे। उन्होंने नेचर-लेड, एक्सपीरिएंशियल और लोकली-एंकरड करिकुलम के महत्व पर जोर दिया, ताकि छात्रों को स्थानीय और राष्ट्रीय पर्यावरणीय वास्तविकताओं के अनुरूप व्यावहारिक कौशल मिल सकें।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि हायर एजुकेशन भारत को ग्रोथ, क्लाइमेट रेज़िलिएंस और सस्टेनेबिलिटी ट्रांज़िशन्स के लक्ष्यों के लिए तैयार कर सके।
