देहरादून। हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते भूस्खलन जोखिम और सुरक्षित विकास को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र द्वारा 5 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण संस्थान, सुद्धोवाला में किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन प्रक्रियाओं और जोखिम को वैज्ञानिक रूप से समझना, सुरक्षित और टिकाऊ अवसंरचना विकसित करना, और सड़कों, पुलों व जलापूर्ति जैसी व्यवस्थाओं के लिए दीर्घकालिक और लचीले इंजीनियरिंग समाधान अपनाना है।
नॉर्वे और भारत के विशेषज्ञों द्वारा ढलान स्थिरता, मृदा सुदृढ़ीकरण, सॉइल नेलिंग, जल निकासी उपाय और उपग्रह आधारित जोखिम मानचित्रण पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रतिभागियों ने हरिद्वार स्थित मनसा देवी भूस्खलन क्षेत्र का क्षेत्रीय भ्रमण कर व्यावहारिक अध्ययन भी किया।
कार्यशाला में भारत, नेपाल और भूटान के विशेषज्ञों के साथ राज्य और केंद्र के विभिन्न विभागों के अधिकारी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण, सुरक्षित विकास और स्थानीय पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना है।
